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Style: Traditional Hindu devotional Hanuman Chalisa, Indian classical bhajan, soulful Indian male singer, accurate Awadhi and Hindi pronunciation, deeply spiritual and melodious, gentle harmonium, soft tabla, bansuri flute, tanpura, subtle temple bells, steady 75 BPM, peaceful temple atmosphere, warm natural vocals, consistent melody throughout all 40 chaupais, no EDM, no Western pop, no rap, no excessive vocal improvisation., aggressive

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[Opening Doha 1] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ [Opening Doha 2] बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ [Chaupai 01] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ [Chaupai 02] राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ [Chaupai 03] महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ [Chaupai 04] कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ [Chaupai 05] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ [Chaupai 06] शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ [Chaupai 07] विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ [Chaupai 08] प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ [Chaupai 09] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ [Chaupai 10] भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ [Chaupai 11] लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ [Chaupai 12] रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ [Chaupai 13] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ [Chaupai 14] सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ [Chaupai 15] जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥ [Chaupai 16] तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ [Chaupai 17] तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ [Chaupai 18] जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ [Chaupai 19] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ [Chaupai 20] दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ [Chaupai 21] राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ [Chaupai 22] सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ [Chaupai 23] आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ [Chaupai 24] भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ [Chaupai 25] नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ [Chaupai 26] संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ [Chaupai 27] सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ [Chaupai 28] और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ [Chaupai 29] चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ [Chaupai 30] साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ [Chaupai 31] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ [Chaupai 32] राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ [Chaupai 33] तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ [Chaupai 34] अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ [Chaupai 35] और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ [Chaupai 36] संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ [Chaupai 37] जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ [Chaupai 38] जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ [Chaupai 39] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ [Chaupai 40] तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ [Closing Doha] पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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