
Ghat Ki Khushi
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Lyrics
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हे छठी मइया, घाटे चलीं अइहा
हे छठी मइया, घाटे चलीं अइहा,
हमरी अरजिया सुनि लीं अइहा।
सूपवा में सजवल बानी फल-फुलवा,
किरपा के नजरिया धरीं अइहा।
हो मइया, धीरे-धीरे गंगा जी के धार,
तोहरे भरोसे बा हमार संसार।
नदिया के तीरे बहे पुरवइया,
लाल चुनरिया ओढ़ेले व्रतिनिया।
पायल के छम-छम, कंगना के खन-खन,
छठी के गीत गावे गाँव के सखियन।
दउरा उठाके चलीं धीरे-धीरे,
दीया जरत बा घाट के तीरे।
हे छठी मइया, घाटे चलीं अइहा,
हमरी अरजिया सुनि लीं अइहा।
सूपवा में सजवल बानी फल-फुलवा,
किरपा के नजरिया धरीं अइहा।
साँझ के बेरा अरघ चढ़ाइब,
सूरुज देव के महिमा गाइब।
दूधवा आ जल से अंजुरी भरब,
परिवार के मंगल कामना करब।
लाल-लाल सूरज गगन में समाइल,
भक्ति के रंगवा मनवा में छाइल।
भोर भइल, पूरुब में लाली छाइल,
सूरुज देव के किरिनिया मुस्काइल।
उगते सुरुज के अरघ चढ़वनी,
छठी मइया के महिमा हम गवनी।
घरवा में गूँजे मंगल के गान,
सुखी रहे सगरी जहान।
हे छठी मइया, घाटे चलीं अइहा,
हमरी अरजिया सुनि लीं अइहा।
सुख-शांति बरसाईं, किरपा बरसाईं,
हमरे अंगनवा खुशहाली लाइहा।