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Matu Lakshmi Kripa Karo
Bhakti

Matu Lakshmi Kripa Karo

Sukanya TomarSukanya Tomar
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Lyrics

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(ओ... ओ... ओ...)

(हो... हो... हो...)

मातु लक्ष्मी करि क्रिपा करो

ह्रिदय में वास दो मोहि

मनो कामना सिद्ध करो

पूरवहु मेरी आस तोहि

सिंधु सुता विष्णुप्रिये

नत शिर बारंबार

रिद्धि सिद्धि मंगलप्रदे

नत शिर बारंबार

जय जय जय लक्ष्मी महारानी

(जय जय जय...)

सब में व्यापित जो गुण खानी

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं

(तेज प्रबल...)

तुम सम कोउ दयाल नाहीं

सिंधु सुता मैं सुमिरौं तोही

ग्यान बुद्धि विद्या दो मोहि

तुम समान नहिं कोई उपकारी

सब विधि पूरबहु आस हमारी

तुम ही हो घट-घट के वासी

विनती यही हमारी खासी

जग जननी जय सिंधु कुमारी

दीनन की तुम हो हितकारी

जय जय जय लक्ष्मी महारानी

(जय जय जय...)

सब में व्यापित जो गुण खानी

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं

(तेज प्रबल...)

तुम सम कोउ दयाल नाहीं

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी

हरो बेगि सब त्रास

(हरो बेगि...)

जयति जयति जय लक्ष्मी

करो शत्रुन का नाश

जय जय जय लक्ष्मी महारानी

(जय जय जय...)

सब में व्यापित जो गुण खानी

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं

(तेज प्रबल...)

तुम सम कोउ दयाल नाहीं

रामदास धरि ध्यान नित

विनय करत कर जोर

(कर जोर...)

मातु लक्ष्मी दास पर

करहु दया की कोर

(दया की कोर...)

(ओ... ओ... ओ...)

(जय मातु... जय मातु...)

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