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Hanuman Ki Jai
Acoustic

Hanuman Ki Jai

TusharTushar
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Style: Traditional Indian Hanuman bhajan, North Indian bhakti kirtan style, powerful male lead vocal in Hindi, 100 BPM, dholak and tabla as main rhythm, harmonium, manjira, damru accents, steady chanting rhythm, devotional, temple atmosphere, acoustic instruments only
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Lyrics

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पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ॥

बन उपबन मग गिरि ग्रिह माहीं । तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ॥

जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकरसुवन बीर हनुमन्ता ॥

बदन कराल काल-कुल-घालक । राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर । अगिन बेताल काल मारी मर ॥

इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ॥

जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी सपथ बिलंब न लावौ ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होय दुसह दुख नासा ॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं । यहि औसर अब केहि गोहरावौं ॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल । ॐ सं सं सहमि पराने खलदल ॥

अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ॥

ताते विनती करौं पुकारी । हरहु सकल दुःख विपति हमारी ॥

ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा । कस न हरहु दुःख संकट मोरा ॥

हे बजरंग, बाण सम धावौ । मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ ॥

हे कपिराज काज कब ऐहौ । अवसर चूकि अन्त पछतैहौ ॥

जन की लाज जात ऐहि बारा । धावहु हे कपि पवन कुमारा ॥

जयति जयति जै जै हनुमाना । जयति जयति गुण ग्यान निधाना ॥

जयति जयति जै जै कपिराई । जयति जयति जै जै सुखदाई ॥

जयति जयति जै राम पियारे । जयति जयति जै सिया दुलारे ॥

जयति जयति मुद मंगलदाता । जयति जयति त्रिभुवन विख्याता ॥

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा । पावत पार नहीं लवलेषा ॥

राम रूप सर्वत्र समाना । देखत रहत सदा हर्षाना ॥

विधि शारदा सहित दिनराती । गावत कपि के गुन बहु भांति ॥

तुम सम नहीं जगत बलवाना । करि विचार देखौं विधि नाना ॥

यह जिय जानि शरण तब आई । ताते विनय करौं चित लाई ॥

सुनि कपि आरत वचन हमारे । मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे ॥

एहि प्रकार विनती कपि केरी । जो जन करैं लहै सुख ढेरी ॥

याके पढ़त वीर हनुमाना । धावत बाण तुल्य बनवाना ॥

मेटत आए दुःख क्षण माहिं । दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं ॥

पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करै प्राण की ॥

डीठ, मूठ, टोनादिक नासै । परक्रित यंत्र मंत्र नहीं त्रासे ॥

भैरवादि सुर करै मिताई । आयुस मानि करै सेवकाई ॥

प्रण कर पाठ करें मन लाई । अल्प-म्रित्यु ग्रह दोष नसाई ॥

आव्रित ग्यारह प्रतिदिन जापै । ताकी छांह काल नहिं चापै ॥

दै गूगुल की धूप हमेशा । करै पाठ तन मिटै कलेषा ॥

यह बजरंग बाण जेहि मारे । ताहि कहौ फिर कौन उबारे ॥

शत्रु समूह मिटै सब आपै । देखत ताहि सुरासुर कांपै ॥

तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई । रहै सदा कपिराज सहाई ॥)

यह बजरंग-बाण जेहि मारै । ताहि कहौ फिरि कवन उबारै ॥

पाठ करै बजर

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