Back to home
Anand Ki Kiran
Folk

Anand Ki Kiran

Saikrupa Restaurant EVCSSaikrupa Restaurant EVCS
0 likes1 plays2:21
Style: Indian devotional bhajan, powerful and soulful male vocal, clear Hindi and Awadhi pronunciation, mid tempo, steady rhythmic chanting, dholak, harmonium, manjira, tabla, soft temple bells, devoted and uplifting, traditional bhakti sound
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Pro & Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान ।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

जय हनुमंत संत हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

जन के काज बिलंब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा । सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ॥

आगे जाय लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुरलोका ॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा । सीता निरखि परमपद लीन्हा ॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ॥

अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ॥

लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी । क्रिपा करहु उर अंतरयामी ॥

जय जय लखन प्रान के दाता । आतुर ह्वै दुख करहु निपाता ॥

जै हनुमान जयति बलसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारू बज्र की कीले ॥

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ॥

ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीशा । ॐ हुं हुं हुं हनु अरिउरसीशा ॥

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै । राम दूत धरू मारू धाइ कै ॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा । दुख पावत जन केहि अपराधा ॥

पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ॥

बन उपबन मग गिरि ग्रिह माहीं । तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ॥

जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकरसुवन बीर हनुमन्ता ॥

बदन कराल काल-कुल-घालक । राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर । अगिन बेताल काल मारी मर ॥

इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद नाम की ॥

जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी सपथ बिलंब न लावौ ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा । सुमिरत होय दुसह दुख नासा ॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं । यहि औसर अब केहि गोहरावौं ॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई । पायँ परौं, कर जोरि मनाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल । ॐ सं सं सहमि पराने खलदल ॥

अपने जन को तुरत उबारौ । सुमिरत होय आनंद हमारौ ॥

ताते विनती करौं पुकारी । हरहु सकल दुःख विपति हमारी ॥

ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा । कस न हरहु दुःख संकट मोरा ॥

हे बजरंग, बाण सम धावौ । मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ ॥

हे कपिराज काज कब ऐहौ । अवसर चूकि अन्त पछतैहौ ॥

जन की लाज जात ऐहि बारा । धावहु हे कपि पवन कुमारा ॥

जयति जयति जै जै हनुमाना । जयति जयति गुण ग्यान निधाना ॥

जयति जयति जै जै कपिराई । जयति जयति जै जै सुखदाई ॥

जयति जयति जै राम पियारे । जयति जयति जै सिया दुलारे ॥

जयति जयति मुद मंगलदाता । जयति जयति त्रिभुवन विख्याता ॥

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा । पावत पार नहीं लवले�

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!