
Nav Durga Mahakavyam
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Lyrics
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जब-जब धरती रोई है,
जब-जब अधर्म ने सिर उठाया,
भक्तों ने जब माँ को पुकारा,
नौ रूपों में माँ का अवतार आया।
नौ रूपों में आई भवानी,
जाग उठी शक्ति जग की पुरानी!
जय अम्बे! जय जगदम्बे!
गूँजे धरती, गूँजे गगन!
तेरी ज्योति से मिट जाएँ,
अंधियारे के सारे बंधन!
जय माता दी! जय माता दी!
हर धड़कन में नाम तेरा,
नौ रूपों में एक ही शक्ति,
माँ, तू ही सवेरा!
हिमगिरि की गोदी से निकली,
हाथों में त्रिशूल सजाए,
शैलपुत्री माँ राह दिखाए,
डगमग मन में साहस जगाए।
हाथों में जपमाला तेरी,
तप से जग उजियारा,
ब्रह्मचारिणी माँ की महिमा,
भक्तों का तू सहारा।
सिंह सवारी, घंटा बाजे,
गूँजे दसों दिशाएँ,
चंद्रघंटा के तेज से माँ,
दुष्ट सभी थर्राएँ!
जब सृष्टि में घोर अँधेरा,
तेरी हँसी से प्रकाश हुआ,
कूष्माण्डा माँ की ज्योति से,
जीवन का आभास हुआ।
गोद में स्कंद, आँखों में ममता,
तेरे आँचल में संसार,
स्कंदमाता, माँ करुणामयी,
तू ही सच्चा प्यार।
सिंह की गर्जन, रण की ज्वाला,
कात्यायनी महाबलशाली,
अन्यायों का अंत करे माँ,
तू जग की रखवाली!
काली रात में बिजली चमके,
काल भी तुझसे थर्राए,
कालरात्रि माँ नाम तुम्हारा,
हर भय दूर भगाए!
श्वेत वसन और निर्मल काया,
चाँद-सी तेरी आभा,
महागौरी माँ कृपा बरसाओ,
प्रेम से भर दो दुनिया।
कमल आसन पर विराजित माता,
ज्ञान और सिद्धि दाती,
सिद्धिदात्री माँ के चरणों में,
हर मन शांति पाती।
नौ रूपों में एक ही शक्ति,
नौ रूपों में एक प्रकाश,
तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति,
तू ही सबकी आस!
शैलपुत्री का धैर्य है तू,
ब्रह्मचारिणी का तप,
कालरात्रि का तेज है तू,
महागौरी का जप!
जय अम्बे! जय जगदम्बे!
जय दुर्गे! जय महाकाली!
जय शैलपुत्री! जय ब्रह्मचारिणी!
जय चंद्रघंटा! जय कूष्माण्डा!
जय स्कंदमाता! जय कात्यायनी!
जय कालरात्रि! जय महागौरी!
जय सिद्धिदात्री! जय भवानी!
जब तक सूरज चाँद रहेगा,
माँ तेरा जयगान रहेगा!
तेरे नाम से भय मिट जाए,
तेरी ज्योति जगमगाए!
जय माता दी! जय माता दी!
गूँजे धरती, गूँजे गगन!
नौ रूपों में एक ही शक्ति,
माँ दुर्गे, तुझे शत-शत नमन!
जब भी मन अंधियारा पाए,
तेरा नाम प्रकाश बन जाए,
मेरे सिर पर हाथ रखना माँ,
जय दुर्गे! जय भवानी!
जय माता दी...