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Morning Light on Water
Acoustic

Morning Light on Water

A
Abhijit
0 likes1 plays4:33
Style: Soulful vocals, female vocal, guitar, flute, peaceful
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Lyrics

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[दोहा 1]

श्रीगुरु चरण सरोज रज।

निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनौं रघुबर बिमल जसु।

जो दायकु फल चारि।

[दोहा 2]

बुद्धिहीन तनु जानिके।

सुमिरौं पवनकुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं।

हरहु कलेस बिकार।

चौपाइ (1 से 40)

[चौपाई 1]

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर।

[चौपाई 2]

राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनिपुत्र पवनसुत नामा।

[चौपाई 3]

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।

[चौपाई 4]

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा।

[चौपाई 5]

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मूंज जनेऊ साजै।

[चौपाई 6]

संकर सुवन केसरीनंदन।

तेज प्रताप महा जग बंदन।

[चौपाई 7]

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर।

[चौपाई 8]

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।

[चौपाई 9]

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

बिकट रूप धरि लंक जरावा।

[चौपाई 10]

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।

[चौपाई 11]

लाय सजीवन लखन जियाए।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाए।

[चौपाई 12]

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।

[चौपाई 13]

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।

[चौपाई 14]

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा।

[चौपाई 15]

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते।

[चौपाई 16]

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाया राज पद दीन्हा।

[चौपाई 17]

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।

लंकेश्वर भए सब जग जाना।

[चौपाई 18]

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।

[चौपाई 19]

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।

[चौपाई 20]

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।

[चौपाई 21]

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे।

[चौपाई 22]

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रच्छक काहू को डर ना।

[चौपाई 23]

आपन तेज संहारो आपै।

तीनों लोक हांक तें कांपै।

[चौपाई 24]

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै।

[चौपाई 25]

नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा।

[चौपाई 26]

संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।

[चौपाई 27]

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा।

[चौपाई 28]

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोई अमित जीवन फल पावै।

[चौपाई 29]

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा।

[चौपाई 30]

साधु संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे।

[चौपाई 31]

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।

[चौपाई 32]

राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दा�

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