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Dil Ka Sannata
Melancholic

Dil Ka Sannata

Haal e zubaanHaal e zubaan
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Style: Classical Ghazal, Bollywood Ghazal, Hindustani Classical, Male Baritone Vocals, Extensive Alaap, Long Vocal Alaap, Classical Sargam, Sa Re Ga Ma, Intricate Taans, Meend, Murkiyan, Soulful Singing, Deep Emotional Vocals, Slow Tempo, Harmonium, Sarangi, Tabla, Tanpura, Orchestral Strings, Cinematic, Melancholic, Mehfil Atmosphere, Long Instrumental Interludes, Expressive Vocal Improvisation, Clear Hindi Urdu Pronunciation,Classical Ghazal, Bollywood Ghazal, Hindustani Classical, Male Baritone Vocal, Extensive Alaap, Long Vocal Alaap, Classical Sargam, Intricate Taans, Meend, Murkiyan, Soulful Singing, Slow Tempo, Harmonium, Sarangi, Tabla, Tanpura, Orchestral Strings, Cinematic, Melancholic, Mehfil Atmosphere, Expressive Vocal Improvisation, Clear Hindi Urdu Pronunciation, sad, male vocal, flute, soft vocals, powerful vocals, peaceful, strings, violin, nostalgic
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एक बच्चे के हथेली से बना संसार था

रेत का घर था मगर उसमें बड़ा विस्तार था

एक बच्चे के हथेली से बना संसार था

रेत का घर था मगर उसमें बड़ा विस्तार था

एक बच्चे के हथेली से बना संसार था

रेत का घर था मगर उसमें बड़ा विस्तार था

बोतलों में प्यास भर कर रख दिया व्यापारी ने

शहर के नदियों को ख़ुद जिसने किया बीमार था

बोतलों में प्यास भर कर रख दिया व्यापारी ने

शहर के नदियों को ख़ुद जिसने किया बीमार था

शहर के नदियों को ख़ुद जिसने किया बीमार था

शहर भर में बिक रही थी धूप तक महँगी बहुत

कल तलक जिस छाँव पर तो सबका ही अधिकार था

बोतलों में प्यास भर कर रख दिया व्यापारी ने

शहर के नदियों को ख़ुद जिसने किया बीमार था

शहर के नदियों को ख़ुद जिसने किया बीमार था

शहर भर में बिक रही थी धूप तक महँगी बहुत

कल तलक जिस छाँव पर तो सबका ही अधिकार था

कल तलक जिस छाँव पर तो सबका ही अधिकार था

जिस नदी में खेलते थे बच्चे, सूखी हो गई

उस नदी के नाम पर अब एक कारोबार था

जिस नदी में खेलते थे बच्चे, सूखी हो गई

उस नदी के नाम पर अब एक कारोबार था

उस नदी के नाम पर अब एक कारोबार था

एक ही छत के तले सब साथ रहते थे मगर

हर किसी के बीच अपना एक अलग संसार था

जिस नदी में खेलते थे बच्चे, सूखी हो गई

उस नदी के नाम पर अब एक कारोबार था

उस नदी के नाम पर अब एक कारोबार था

एक ही छत के तले सब साथ रहते थे मगर

हर किसी के बीच अपना एक अलग संसार था

हर किसी के बीच अपना एक अलग संसार था

जिसको समझा था फ़क़त अपना, वही निकला अलग

घर के कमरों को यहां बस आइनों से प्यार था

घर के कमरों को यहां बस आइनों से प्यार था

हमने दरवाज़े तो सारे बंद कर के रक्खे थे

ख़ुशबुओं का फिर भी घर में मेरे कारोबार था

ख़ुशबुओं का फिर भी घर में मेरे कारोबार था

शाख़ फल से झुक गई, हम समझे थे वो डर गई

असलियत में उसका झुकना उसका तो किरदार था

असलियत में उसका झुकना उसका तो किरदार था

दुनिया दीपक के उजाले से यहां तक आई है

कौन कहता है कि जलने का हुनर बेकार था

कौन कहता है कि जलने का हुनर बेकार था

एक बच्चे के हथेली से बना संसार था

रेत का घर था मगर उसमें बड़ा विस्तार था

रेत का घर था मगर उसमें बड़ा विस्तार था

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