
Echoes of a Broken Heart
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तेरी विदाई के दिन
[Intro]
छह साल का रिश्ता था…
कोई दो दिन का अफ़साना नहीं,
वो मेरी आदत थी…
कोई गुज़रा हुआ ज़माना नहीं।
मैं दुनिया जीतने निकला था,
मुझे क्या पता था…
जिसे अपना घर समझा,
एक दिन उसी को विदा करना था।
[Verse 1]
जब खाली थे हाथ मेरे,
तब तू मेरे साथ थी,
ना दौलत की कोई बात थी,
ना दुनिया की औकात थी।
तुझे तो बस थोड़ा वक़्त चाहिए था,
मुझसे दो पल का साथ चाहिए था,
मैं कल को बेहतर करने में लगा रहा,
तेरा आज मुझसे दूर होता रहा।
मैं सोचता रहा, सब ठीक कर दूँगा,
एक दिन तेरे हर ख़्वाब को जी लूँगा,
पर वक़्त ने ऐसी बाज़ी पलट दी,
मेरी मंज़िल ने मुझसे मेरी मंज़िल ही छीन ली।
[Pre]
काश मैं पैसों से पहले,
तेरी ख़ामोशी पढ़ लेता,
तू पास थी मेरे फिर भी,
तुझे थोड़ा और वक़्त दे देता।
अब ख़ुद से एक सवाल है,
जिसका जवाब नहीं मिलता…
जिसे पाने के लिए कल चाहिए था,
वो आज मेरे पास क्यों नहीं मिलता?
[Chorus]
तेरी विदाई के दिन, मैं भी टूटा था,
सबके सामने चुप था, अकेले में रोया था…
तेरे हाथों की मेहंदी, तेरा दुल्हन-सा रूप,
मेरी आँखों में आँसू, मेरे लबों पे चुप…
तू किसी और की दुनिया सजा गई,
मैं अपनी ही दुनिया में तन्हा रह गया…
छह साल की मोहब्बत का बस इतना अंजाम—
तू किसी की हमसफ़र, मैं तेरा गुज़रा हुआ नाम।
[Verse 2]
हल्दी के रंग में एक कल दिखा था,
मेहंदी के बीच मेरा ख़्वाब छुपा था,
शादी के दिन जब तुझे देखा था मैंने,
ख़ुद को ज़िंदा रखने का बहाना किया था मैंने।
तेरी विदाई का वो मंज़र,
आज भी दिल से जाता नहीं,
चेहरा तो सबके सामने सँभाल लिया,
पर अंदर का लड़का सँभल पाता नहीं।
तू कह गई थी, शादी तक बात होगी,
फिर तेरी दुनिया किसी और के साथ होगी,
मैं आज भी उस आख़िरी मोड़ पे खड़ा हूँ,
जहाँ तेरा रास्ता अलग, मेरा रास्ता जुदा हो।
[Rap Transition — Piano Fades, Dark Trap Beat Enters]
[Rap Verse — Deep Male Voice, Emotional Flow]
छह साल का रिश्ता, छह साल का सफ़र,
तुझे पाने की चाहत, ख़ुद से बेख़बर,
मैं कल की फ़िक्र में आज खो बैठा,
तेरे पास रहकर भी तुझे खो बैठा।
पैसे भी कम थे, परेशान था घर,
तुझे वक़्त ना दे पाया, ये चुभता है अब,
तू माँगती थी पल, मैं कल ढूँढता रहा,
तेरा दिल मुझसे दूर, मैं ख़्वाब बुनता रहा।
फिर हल्दी, फिर मेहंदी, फिर शादी का दिन,
चेहरे पे ख़ामोशी, दिल में तूफ़ान था उस दिन,
तुझे दुल्हन बना देखा, कुछ कह ना सका,
तू जाती रही और मैं रह ना सका…
ना तुझे रोकूँगा, ना तेरा घर तोड़ूँगा,
तेरी ख़ुशी के आगे अपना दर्द ना रखूँगा,
पर जो ख़्वाब देखे थे, उनका क्या करूँ?
तेरी यादों को लेकर मैं कहाँ तक चलूँ?
अब गिर के उठूँगा, अपनी पहचान बनाऊँगा,
अपने घर की ख़