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Kahan Gailu Ae Hamar Sugiya
Folk

Kahan Gailu Ae Hamar Sugiya

Ak AlbertAk Albert
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Lyrics

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(हो... हो...)

ए हमार अंगनवा के दुलरिया

काहे छोड़ गइलू हमनी के

जे अँगनवा में तोहार किलकारी गूँजे

ओह अँगनवा में सन्नाटा छा गइल

जे घरवा तोहरे हँसी से चमकत रहे

ओह घर के उजियारा कहाँ खो गइल

तोहरे नन्हकी पाँव के छाप खोजतानी

दुअरिया-दुअरिया भटके नजरिया हमार

ए हमार अंगनवा के छोटकी दुलरुआ

कहाँ गइलू छोड़ के घर-दुआर हो

तोहरे बिना सूना पड़ल बा अँगनवा

सूना लागे सगरो संसार हो

(सूना लागे, सूना लागे)

कइसे अचानक हाथ छुड़ा गइलू

काहे ना सुनलू हमार पुकार हो

माई के अँखिया से नीर ना सूखे

बाबू के छाती में उठे हाहाकार

तोहार नाम लेके घरवा पुकारे

कइसे सहीं ई दुखवा अपार

कौना से पूछीं, कहाँ तोहके खोजीं

कौना राह से अइबू ए हमार जान

ए हमार अंगनवा के छोटकी दुलरुआ

कहाँ गइलू छोड़ के घर-दुआर हो

तोहरे बिना सूना पड़ल बा अँगनवा

सूना लागे सगरो संसार हो

(हो... हो... हो...)

तोहार खिलौना ओसहीं पड़ल बा

तोहार छोटकी चुनरी ताके दुआर

रातिया में सपना बनके तू अइबू

माथे पे हाथ फेरि मुस्कइबू

नींद खुले त खाली बिछवनवा देखीं

फेर तोहरे याद में रोवत रह जइबू

ए हमार सुगिया, ए हमार दुलरिया

कहाँ गइलू छोड़ के घर-दुआर हो

तोहरे बिना सूना पड़ल बा अँगनवा

सूना लागे सगरो संसार हो

(लौट आ, लौट आ)

जहवाँ रहबू, खुश रहिहा बिटिया

एही बा हमनी के अंतिम पुकार हो

सो जा ए सुगिया, चैन से सो जा

हमार दुआ तोहरे संगे रही

(हो... हो...)

तोहार याद दिलवा में बसल रही

तोहार जगह केहू ना ले सकी

(हो... हो... हो...)

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