
Raat Ke Saaye Mein
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Lyrics
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[Intro]
[Verse 1]
क्या ही जानेगा समंदर कभी सूखे की बात
कोई कहता ही नहीं होगा किनारे की बात
मोम के शहर में सूरज का गुज़रना कैसा
कौन सुनता यहाँ पत्थर के पिघलने की बात
रेत के हाथ में दरिया की लकीरें देखीं
किसको मालूम है मिटते हुए नक़्शे की बात
[Verse 2]
हादसा गुज़रा मेरे साथ तो समझा मैंने
मुझको सुन लेना था उस एक फ़रिश्ते की बात
एक जुगनू ने अँधेरे से बग़ावत कर दी
तब चराग़ों ने उठाया है बुझाने की बात
चाँद तालाब में उतरा तो ये महसूस हुआ
प्यास पानी में भी करती है किनारे की बात
[Instrumental]
[Verse 3]
पेड़ के पाँव में ज़ंजीर पड़ी है शायद
तभी करता नहीं जंगल कहीं जाने की बात
बर्फ़ के शहर में इक आग का दरिया बहता
कौन समझेगा यहाँ राख के होने की बात
चिड़िया दाने को तरसती रही थी पिंजरे में
और मालिक ने की उड़ने के सलीक़े की बात
[Verse 4]
तुम भी नाराज़ हो कर बैठ गये मेरी जान
कम से कम तुम तो समझ लो मेरे ग़ुस्से की बात
पेड़ ने धूप को शाख़ों में पनाहें तो दीं
पत्ते करते रहे अपने ही ठिकाने की बात
[Instrumental]
[Verse 5]
एक पत्थर ने समंदर को पुकारा ऐसे
जैसे ख़ामोश पहाड़ों में हो झरने की बात
आइने पर जो ज़रा गर्द जमी थी बरसों
चेहरा करने लगा दीवार से मिलने की बात
शाख़ से करता परिंदा है अँधेरे की बात
खुला आकाश भी सुनता है शिकारे की बात
[Verse 6]
वो जो ख़ामोश रहा, पढ़ न सका कोई भी
उसकी आँखों में छुपी थी किसी लम्हे की बात
घर की दहलीज़ पे सदियों से खड़ा है कोई
कौन समझेगा भला लौट के आने की बात
[Verse 7]
सबने बाज़ार में ईमान की क़ीमत पूछी
कौन करता है यहाँ रूह के सौदे की बात
जिसने अपनों के लिए ख़ुद को भुला डाला हो
उससे मत पूछना दुनिया में अकेले की बात
[Outro]