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Chaar Saal Ka Sawaal
Ballad

Chaar Saal Ka Sawaal

Divyansh ThakurDivyansh Thakur
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Lyrics

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(हो...)

चार साल का वो रिश्ता था

दिल उसका गुलाम था

वो उसकी दुनिया थी

उस पर ऐतबार था

वो उसकी जान थी

वो उसका अरमान था

फिर कुछ लोग बीच में आए

बदल गई कहानी

जिसे अपना माना था

वही हुई बेगानी

मैं तुझे चाहता रहा

तू दूर होती रही

मैं अपना मानता रहा

तू ख़फ़ा होती रही

चार साल की मोहब्बत

पल भर में मिट गई

मेरी सच्ची कहानी

झूठी बातों में छिप गई

तेरे गाँव की गलियों में

कितने चक्कर लगाए

बस तुझको देखने को

कितने रास्ते अपनाए

तेरी यादों के सहारे

मैंने दिन गुज़ारे हैं

तेरे बिना ये लम्हे

मुझे कितने भारी हैं

मैं तुझे चाहता रहा

तू दूर होती रही

मैं अपना मानता रहा

तू ख़फ़ा होती रही

चार साल की मोहब्बत

पल भर में मिट गई

मेरी सच्ची कहानी

झूठी बातों में छिप गई

तुझे क्या पता

वो कितना अकेला है

हँसता है सबके आगे

अंदर से टूटा है

मैं तुझे चाहता रहा

तू दूर होती रही

मैं अपना मानता रहा

तू ख़फ़ा होती रही

चार साल का रिश्ता था

कोई सपना छोटा नहीं

मैंने तुझको सच्चा चाहा

इसमें मेरा दोष नहीं

(हो...)

डेढ़ साल गुज़र गया

पर दर्द पुराना है

उसके दिल में आज भी

उसका ही फ़साना है

(हो... हो...)

वो लौटे या न लौटे

तेरी ज़िंदगी कीमती है

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