
Bachpan Ki Galiyan
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
बचपना
Hindi Emotional Cinematic Ballad
वक़्त से पहले बड़ा हुआ,
कुछ पीछे छूट गया…
हँसने की उम्र में मेरा,
बचपन मुझसे रूठ गया…
खेलने की उम्र में फ़र्ज़ निभाने लगा,
छोटी-सी उम्र में बोझ उठाने लगा।
ख़्वाबों को रख दिया घर की ज़रूरतों तले,
ख़ुद को भुला दिया अपनों के वास्ते।
हँसने की उम्र में समझदार हो गया,
जाने कब बचपन मुझसे दूर हो गया।
चेहरे पे वक़्त से पहले ठहराव आ गया,
दिल बच्चा ही रहा, मगर आदमी बन गया।
दुनिया ने मेरी समझदारी के क़िस्से सुनाए,
काश, किसी ने पूछा होता, कैसे दिन बिताए…
मैंने बचपना बेच दिया,
बहुत सस्ते में बेच दिया,
चंद ज़िम्मेदारियों के बदले,
अपना ही बचपन खो दिया।
सबने कहा, कितना समझदार है,
किसी ने न जाना, कितना लाचार है,
मैं उम्र से पहले बड़ा हो गया,
मेरा बचपन मुझसे जुदा हो गया…
जब किसी बच्चे को बेफ़िक्र हँसते देखता हूँ,
अपने ही बीते दिनों में खोने लगता हूँ।
उसकी हँसी में अपना ज़माना मिलता है,
मेरा खोया बचपन नज़रें चुराता है।
वो छोटी-सी दुनिया, वो बेवजह मुस्कुराना,
बिना किसी फ़िक्र के सोना और जाग जाना।
न कल की चिंता थी, न कल का कोई डर,
कहाँ खो गया वो बेपरवाह-सा सफ़र?
काश, कोई कहता, अभी इतना बोझ नहीं,
हर दर्द सहना तेरी उम्र का फ़र्ज़ नहीं।
कुछ ख़्वाब अपने लिए भी बचाकर रखना,
हर हाल में ख़ुद को मज़बूत मत रखना…
मैंने बचपना बेच दिया,
बहुत सस्ते में बेच दिया,
चंद ज़िम्मेदारियों के बदले,
अपना ही बचपन खो दिया।
सबने कहा, कितना समझदार है,
किसी ने न जाना, कितना लाचार है,
मैं उम्र से पहले बड़ा हो गया,
मेरा बचपन मुझसे जुदा हो गया…
आज सब कुछ है, मगर वो बेफ़िक्री नहीं,
चेहरे पे हँसी है, मगर वो ख़ुशी नहीं।
ज़िंदगी ने दिया है बहुत कुछ मुझे,
बस वो बीता हुआ दौर दिया ही नहीं।
अब वक़्त से शिकायत भी क्या करूँ,
किससे अपने बचपन की बातें करूँ?
जिस उम्र में जीना था, हिसाब करता रहा,
मैं बड़ा होता गया… ख़ुद से बिछड़ता रहा…
मैंने बचपना बेच दिया,
बिना उसका मोल जाने,
ख़ुद को बड़ा बनाते-बनाते,
ख़ुद को ही खो दिया मैंने।
अब लौटकर वो दिन नहीं आएँगे,
वो बेफ़िक्र लम्हे नहीं मुस्कुराएँगे,
जिस बचपन को सस्ते में बेचा था मैंने,
वक़्त उसके पैसे भी नहीं लौटाएगा…
काश, कोई मुझसे पूछता…
तू इतना ख़ामोश क्यों है?
काश, कोई मुझे कहता…
अभी बच्चा है तू…
इतना बड़ा होना ज़रूरी नहीं है…
वक़्त ने सब कुछ लौटा दिया…
बस…
मेरा बचपन नहीं…