Back to home
گلهای شهر در سوگ پریسا
Ballad

گلهای شهر در سوگ پریسا

Hasan sh1984Hasan sh1984
0 likes0 plays3:15
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Pro & Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

(हो...)

शहर की सड़कों पर सन्नाटा छाया है

गुलों की टोकरी अधूरी पड़ी है

बाज़ार में इक ख़ामोशी पड़ी है

वो हँसती थी जिस शाम की महफ़िलों में

वो शाम अब किसी और की हुई है

परीसा, परीसा, कहाँ चली गई तू?

(परीसा... परीसा...)

गुलों का शहर अब सूना पड़ा है

तेरे बिना हर रंग फीका पड़ा है

(हर रंग फीका...)

परीसा, परीसा, लौट आ ज़रा तू

ख़िज़ा का मौसम था, पतझड़ की रातें

वो आख़िरी मुलाक़ातें, वो अधूरी बातें

ख़ुदा से पूछा मैंने, क्यों इतना जल्दी?

किसी के सपनों का यूँ टूटना क्या है?

परीसा, परीसा, कहाँ चली गई तू?

(परीसा... परीसा...)

गुलों का शहर अब सूना पड़ा है

तेरे बिना हर रंग फीका पड़ा है

(हर रंग फीका...)

परीसा, परीसा, लौट आ ज़रा तू

तेरी यादों का हर काँटा

दिल में गहरा धँसा है

(धँसा है... धँसा है...)

तेरे गुलों की महक अब

इन हवाओं में बसा है

परीसा, परीसा, कहाँ चली गई तू?

(परीसा... परीसा...)

इस शहर की हर गली तुझे पुकारे

हर फूल तेरे नाम पे मुस्कुराए

(मुस्कुराए...)

परीसा, परीसा, मेरी परीसा...

(परीसा...)

(परीसा...)

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!