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Shyam KumarShyam Kumar
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Style: sad
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समय का खेल निराला

Hyy hyy… Sk Song animated by Shyam!

[Intro]

ओ रे मुसाफ़िर, ज़रा देख दुनिया,

किस बात का तुझको अभिमान है?

आज तेरे हाथों में खुशियाँ हैं,

कल किसके हाथ में जहान है?

कोई हँसता है, कोई रोता है,

कोई अपनों को खोता है,

इस दुनिया के रंगमंच पर,

हर इंसान अपना किरदार निभाता है।

[Chorus]

समय का खेल निराला है,

ये दुनिया आने-जाने वालों का मेला है,

आज किसी के सिर पर ताज सजा,

कल वक्त ने उसको भी परखा है।

समय का पहिया चलता जाए,

कोई हँसे, कोई आँसू बहाए,

कर्मों की गठरी साथ चले,

जो बोए, वही इंसान पाए।

[Verse 1]

कल तक जिसके आगे दुनिया,

अपना सिर झुकाती थी,

उसकी एक आवाज़ पर देखो,

महफ़िल दौड़ी आती थी।

आज वही तन्हा बैठा है,

यादों को गले लगाकर,

वक्त ने उसको समझा दिया,

क्या मिलता है घमंड दिखाकर।

महलों में रहने वालों को,

झोपड़ियों का दर्द न आया,

जब किस्मत ने करवट बदली,

तब जीवन का अर्थ समझ आया।

ना ऊँचा घर, ना ऊँची कुर्सी,

इंसान की पहचान है,

जिसके दिल में दया बसी हो,

वही असली धनवान है।

[Chorus]

समय का खेल निराला है,

ये दुनिया आने-जाने वालों का मेला है,

आज किसी के सिर पर ताज सजा,

कल वक्त ने उसको भी परखा है।

समय का पहिया चलता जाए,

कोई हँसे, कोई आँसू बहाए,

कर्मों की गठरी साथ चले,

जो बोए, वही इंसान पाए।

[Verse 2]

जब तक जेब में पैसा था,

हर रिश्ता अपना लगता था,

घर के दरवाज़े पर देखो,

हर चेहरा हँसता दिखता था।

मुश्किल ने जब दस्तक दी,

महफ़िल धीरे-धीरे छूटी,

कुछ ने हाथ छुड़ा लिया,

कुछ की दोस्ती निकली झूठी।

लेकिन एक दिया ऐसा भी,

अँधियारे में जलता रहा,

जब दुनिया ने मुँह मोड़ लिया,

एक अपना साथ चलता रहा।

रिश्ते दौलत से नहीं बनते,

रिश्ते दिल से बनते हैं,

जो आँसू में हाथ थाम लें,

वही अपने कहलाते हैं।

[संगीत – बाँसुरी और वायलिन का भावुक टुकड़ा]

ओ वक्त ज़रा इतना बतला,

क्यों बदलते हैं इंसान?

क्यों खुशियों में भीड़ लगे,

दुख में सूना हो मकान?

क्यों मीठे वादे टूट गए,

क्यों अपने रूठ गए?

क्यों जिन पर था सबसे भरोसा,

वही रास्ते बदल गए?

[Verse 3]

बचपन बीता खेल-खिलौनों में,

जवानी सपनों के पीछे,

बूढ़ी आँखें राह निहारें,

अपने घर के आँगन नीचे।

जिस माँ ने रातें काटी थीं,

बेटे की एक मुस्कान में,

वही माँ चुप बैठी रहती है,

आज पुराने मकान में।

जिस पिता ने धूप सही थी,

बच्चों की परछाईं बनकर,

एक दिन वही चुप हो जाता,

अपनी थकान छुपाकर।

समय किसी को रोक न पाया,

ना बचपन, ना जवानी,

इसलिए अपनों से प्यार कर,

यही ज़िंदगी की कहानी।

[Chorus]

समय का खेल निराला है,

हर पल बदलने वाला है,

जो आज हँसता है दुनिया पर,

कल उसका भी इम्तिहान आने वाला है।

समय का पहिया चलता जाए,

र

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