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AADITYA PRAKASH TYAGIAADITYA PRAKASH TYAGI
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Style: शक्तिशाली हनुमान चालीसा, जोश से भरी पुरुष आवाज, बजरंगबली जैसी गर्जना, तेज गति, पारंपरिक ढोल, नगाड़ा, ताशा, मंदिर की घंटियाँ, शंख ध्वनि, मंजीरा, करताल, हारमोनियम, हर चौपाई के बाद समूह में जय सिया राम जय जय हनुमान का जयकारा, दिव्य शक्ति, रोंगटे खड़े कर देने वाली ऊर्जा, देसी अखाड़ा सत्संग जैसा माहौल, आनंददायक पाठ

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥

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