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Untitled

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Ashwin SardaAshwin Sarda
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Style: drum and bass, breakbeat, bass, synth, 174 bpm, energetic, intense, rolling, female vocal, peaceful
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।। ।।

जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ॥

॥ जय श्री राम ॥

॥ जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। जय श्री राम ।।

।। हनुमान चालीसा ।।

श्रीगुरु चरन सरोज रजनिज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।

जय हनुमान ग्यान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ।।

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ।।एक।।

महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा ।।दो।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै ।।

शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन ।।तीन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ।।चार।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे ।पंद्रह।।

लाय सजीवन लखन जियाये।

श्रीरघुवीर हरषि उर लाये ।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।छह।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा ।।सात।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।आठ।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।नौ।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।दस।।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आग्या बिनु पैसारे ।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना ।।ग्यारह।।

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हांक तें कांपै ।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

नासै रोग हरै सब पीरा।

महावीर जब नाम सुनावै ।।बारह।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन

क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।तेरह।।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा ।।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोड़ अमित जीवन फल पावै ।।चौदह।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा ।।

साधु-संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे ।।पंद्रह।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

। अस बर दीन जानकी माता ।।

राम �

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