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Manyata RanaManyata Rana
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Style: Lofi hip-hop

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार| जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। काँधे मुंज जनेऊ साजे।। संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रुप धरि सियहि दिखावा। बिकट रुप धरि लंक जरावा।। भीम रुप धरि असुर संहरे। रामचन्द्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस्र बदन तुमरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति के कण्ठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।। तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकार। राम मिलाय राज पद दीन्हो।। तुम्रो मन्त्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।। युग सहस्र योजन पर भानू। लिलील्यो तहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्रे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक ते काँपै।। भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस বর दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्रे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्रे भजन राम को पावै। जन्म जन्म के दुख बिसरावै।। अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरै। हनुमत सेइ सर्ब सुख करै।। संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महासुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।। पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहू सुर भूप।।

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