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Maa Durga Vandana
Devotional

Maa Durga Vandana

Chandra P GuptaChandra P Gupta
0 likes2 plays6:09
Style: Slow, peaceful Indian devotional music, 100 BPM, crystal-clear female Sanskrit vocals, gentle classical singing, soft tabla, tanpura, harmonium, temple bells, conch, divine Maa Durga atmosphere, soothing melody, clear pronunciation, no extra lyrics, no rap, no EDM., female vocal
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Lyrics

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अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रव्रिते। सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गव्रिते। शितक्रितफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते। अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले। अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते। निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भ्रित केलितले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्क्रित चन्द्ररुचे प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते क्रितसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते। सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते। जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योनुदिनं सुशिवे अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत्। तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम् भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम्। तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम् जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते। मम तु मतं शिवनामधने भवती क्रिपया किमुत क्रियते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

अयि मयि दीन दयालुतया क्रिपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननी क्रिपयासि यथासि तथानुमितासिरते। यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

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