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RG SongRG Song
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Style: edm, synth, bass, kick drum, 128 bpm, euphoric, pulsating, energetic, drop, Heavy bass, male vocal

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श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधार। बरणौ रघुबर बिमल यश, जो दायक फल चार॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिराउ पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपिरीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा॥ महावीर बिक्रम बजरंगी। कুমति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन विराज सुवेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ हाथ वज्र और ध्वजा विराजे। कांधे मूँज जनेऊ साजे॥ शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंका जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सवारे॥ लाय संजीवन लखन जियाए। श्रీरघुबीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई॥ सहस्र बदन तुम्हरो जस गावै। अस कही श्रीपति कंठ लगावै॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोबिद कहि सकें कहां ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीनहा। राम मिलाय राज पद दीनहा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गयें अचरज नाहीं॥ दुरगम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमिज जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पास। सदा रहो रघुपति के दास॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहां जनम हरिभक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो शत बार पाठ कर कोई। छुटहिं बंदी महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥ पवनतनय संकट हरण, मंगल मूर्ति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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