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مناحي حزامي درع المجد
Nabati Poetry

مناحي حزامي درع المجد

ت
تبنين
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Lyrics

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(हो...)

सुनो ज़रा, ये दास्ताँ

दिल की ज़ुबाँ, बे-तकल्लुफ़ बयाँ

अब्दा से बस्मा, रब्बी अज़ीम

वकील है वो, ग़ाफ़िर करीम

हर ज़र्रे में नूर उसका

हर दिल में है उसकी रहमतों का निज़ाम

मरहबा, मरहबा, ऐ मेहमानों

चाँद सितारे, सब करें सलाम

(मरहबा, मरहबा)

हमारे दिल के, ये ताज महल

तुम्हारे क़दमों में, पेश है ये आलम

अबू मनाही, तेरी शान निराली

सर उठा के चल, तू है वो उजाली

तेरी हिम्मत, तेरा एतबार

हर मुश्किल में, तू ही है हमारा किनारा

मरहबा, मरहबा, ऐ मेहमानों

चाँद सितारे, सब करें सलाम

(मरहबा, मरहबा)

हमारे दिल के, ये ताज महल

तुम्हारे क़दमों में, पेश है ये आलम

भाई मेरे, साथी मेरे

दुआओं में, नाम तेरा

(तेरा, तेरा)

हर पल, हर घड़ी

मरहबा, मरहबा, ऐ मेहमानों

चाँद सितारे, सब करें सलाम

(मरहबा, मरहबा)

हमारे दिल के, ये ताज महल

तुम्हारे क़दमों में, पेश है ये आलम

(हो...)

पेश है ये आलम...

(मरहबा...)

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