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Whispers Turn To Brass
Acoustic

Whispers Turn To Brass

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Style: Melodic, Acoustic, Soulful vocals, Upbeat, Energetic, duet, rap, female vocal, male vocal, whisper, powerful vocals, soft vocals, auto-tune, piano, guitar, drums, bass, strings, brass, violin, flute, romantic, peaceful, happy, sad
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Lyrics

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[Intro]

रात के सन्नाटे में तेरा नाम सुनाई देता है,

कोई पास नहीं होता, फिर भी तू दिखाई देता है…

ये इश्क है या साया, मुझे आज तक खबर नहीं,

तू मेरे अंदर ज़िंदा है, या मैं ज़िंदा हूँ ही नहीं…

[Verse 1]

तेरी आँखों में डूबा तो किनारा न मिला,

तेरे जैसा मुझे कोई दोबारा न मिला…

तेरी बाहों में आकर मैं जहाँ भूल जाता हूँ,

तेरे माथे को चूमकर खुद को पाता हूँ…

तू हँसे तो मेरे दिल में बहार आ जाए,

तू रोए तो मेरी रूह भी बिखर जाए…

तुझे चाहा है मैंने किसी ख्वाब की तरह नहीं,

तू मेरी रूह में बसी है किसी नाम की तरह नहीं…

[Pre]

रात के तीन बजे, दरवाज़े पे दस्तक हुई,

कमरे में कोई नहीं, फिर भी आहट तेरी हुई…

शीशे पे लिखा था, हवा ने कुछ कहा,

"मुझे भूल न जाना, चाहे छोड़ दे जहाँ…"

[Chorus]

क़ब्र तक तेरा, मेरा इश्क जाएगा,

जिस्म मिट्टी होगा, दिल तुझे ही चाहेगा…

दुनिया भुला देगी, ज़माना मिटाएगा,

मेरी रूह का हर ज़ख्म तेरा नाम गाएगा…

रब से बस इतना है, जब आख़िरी रात हो,

मेरी क़ब्र के पास तेरा हाथ मेरे हाथ हो…

[Verse 2]

एक लड़का घर से निकला था अरमान लेकर,

माँ की दुआ और बाप का सम्मान लेकर…

जेब में कुछ नोट थे, आँखों में जहाँ,

घर पे सबको लगता था, खुश है उनका बेटा यहाँ…

एक कमरा, चार दीवारें, रातों का अंधेरा,

सबके लिए कमाता था, खुद कौन था सहारा?

महीने की तनख्वाह आई, हिसाब खड़े थे,

किराया और घर के खर्चे, ख्वाब पड़े थे…

माँ पूछे, "बेटा, तू खाना खाता है?"

वो भूखा रहकर बोले, "हाँ माँ, सब अच्छा है…"

त्योहारों पे घर में दिए जलते रहे,

वो परदेस में अपने आँसू पीता रहा…

घर से दूर था, पर घर का सहारा था,

सबकी खुशी के पीछे एक चेहरा बेचारा था…

लोग कहते, "मर्द है, आँसू छुपा लेता है,"

कोई पूछे उसके दिल से, कितना दर्द उठा लेता है…

वो घर बनाने निकला था, खुद बेघर सा हो गया,

सबकी ज़िंदगी सजाते-सजाते खुद अंदर से खो गया…

[Verse 3]

वो कहती, "तू बदल गया," वो कुछ कह न सका,

दिल में सौ तूफान थे, एक आँसू बह न सका…

उसकी call पे वो हँसकर थकान भुलाता था,

Phone कटने के बाद तकिये में मुँह छुपाता था…

मोहब्बत सिर्फ पास रहने का नाम नहीं होता,

दूर रहकर भी कोई दिल से जुड़ा नहीं होता…

पर गरीबी का अंधेरा भी बेरहम होता है,

प्यार सच्चा हो फिर भी इंसान मजबूर होता है…

[Verse 4]

एक सपना था आँखों में, एक दिन नाम कमाऊँगा,

जिस घर ने दर्द देखा, उस घर को जन्नत बनाऊँगा…

साल गुज़रते गए, मंज़िल दूर होती गई,

जेब हल्की होती गई, ज़िम्मेदारी बढ़ती गई…

मंदिर की सीढ़ियों पे सर झुका के आया,

"हे भगवान, थक गया हूँ, पर हारने नहीं आया…"

महल नहीं माँगा, न सोना-चाँदी माँगा,

अपनों के चेहरे पे सुकू

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