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Sapne Mehange Hausle Zinda
Emotional Rap

Sapne Mehange Hausle Zinda

RISHABH KUMAR KUSHWAHARISHABH KUMAR KUSHWAHA
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(हो...)

ये कहानी किसी फ़िल्म की नहीं,

एक ऐसे बच्चे की है जिसके सपने कम नहीं…

बस जेब में पैसे कम थे,

और मंज़िल तक जाने के रास्ते आसान नहीं।

घर वालों से सुना, मेरी साँसें थम गई थीं,

ज़िंदगी की पहली जंग भी मैंने तब ही लड़ी थी,

तीन साल की उमर में किताबों से नाता,

पढ़ने में तेज़ था, सपनों से था वास्ता।

फिर एक साल मेरी पढ़ाई पर लगा दिया विराम,

घर वालों के मन में था, कहीं बिगड़ न जाए दिमाग़,

वक़्त बीतता गया, मैं स्कूल में बढ़ता गया,

छोटी सी उमर का बच्चा नए सपने बुनता गया।

चौथी क्लास में बोल दिया, "डॉक्टर बनूँगा एक दिन,"

दादा ने उस बात को बना लिया अपने दिल का यक़ीन,

पर डॉक्टर बनना मेरा ख़ुद का सपना नहीं था,

उनकी आँखों में जो सपना था, मेरा इरादा वही नहीं था।

सपने थे बड़े, पर जेब में पैसे कम,

रास्ते थे मुश्किल, पर हौसले नहीं हुए ख़त्म,

किस्मत ने रोका, वक़्त ने आज़माया,

हर मोड़ पे मैंने नया सपना बनाया।

सपने थे बड़े, पर जेब में पैसे कम,

दिल में थी आग, चाहे आँखों में नमी,

मुझे बस पढ़ना है, अपनी पहचान बनानी है,

अपनी मेहनत से एक नई कहानी लिखनी है।

(सपने थे बड़े…)

आठवीं में फिर से पढ़ने का जुनून जागा,

पर पैसों की दीवार ने हर रास्ता रोका,

नौवीं में रिश्तेदार के घर रहना पड़ा,

उनके ख़र्चे पे था, तो डाँटना भी सहना पड़ा।

हर रोज़ की डाँट के बीच भी सपने सजाए,

दिल में जो अरमान थे, किसी तरह बचाए,

दसवीं के दौर में दादा का साथ छूट गया,

उनके साथ एक सपना भी यादों में सिमट गया।

उनकी उम्मीदों को मैं आज भी समझता हूँ,

पर अपनी मंज़िल के लिए अपना रास्ता चुनता हूँ,

डॉक्टर नहीं बन पाया उनके सपने के हिसाब से,

पर उनकी यादों को रखता हूँ दिल के पास में।

सपने थे बड़े, पर जेब में पैसे कम,

रास्ते थे मुश्किल, पर हौसले नहीं हुए ख़त्म,

किस्मत ने रोका, वक़्त ने आज़माया,

हर मोड़ पे मैंने नया सपना बनाया

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