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Pipraun Gam Ke Jhijhiya Bahar
Folk

Pipraun Gam Ke Jhijhiya Bahar

Sati Ranjan KumarSati Ranjan Kumar
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(हो... हो...)

पिपरौन गाम में सजलै, झिझिया के बहार गे

डाइनो आ सखी निकलली, लय मइया के प्यार गे

छनन-छनन पैंजनिया बाजै, झिलमिल करै रात गे

जय दुर्गे, जय भवानी, राखू सभपर हाथ गे

पिपरौन गामक झिझिया, देखय सगरो संसार गे

(झिझिया, झिझिया)

माता रानी के भक्ति में, झूमय मिथिला परिवार गे

जय दुर्गे, जय भवानी, राखू सभपर हाथ गे

लाल चुनरिया, माथे टिकुली, नयन में काजर कारी गे

हाथ में पूजा के थारी, मुख पर हँसी प्यारी गे

सिर पर झिझिया, दीप जरै छै, चमकै रूप हजार गे

डाइनो चलली मइया भवन, करय जय-जयकार गे

पिपरौन गामक झिझिया, देखय सगरो संसार गे

(झिझिया, झिझिया)

माता रानी के भक्ति में, झूमय मिथिला परिवार गे

जय दुर्गे, जय भवानी, राखू सभपर हाथ गे

हे दुर्गा मइया, हे काली मइया, सुनि लिअ अरज हमार गे

पिपरौन गाम पर क्रिपा बरसाउ, भरि दिअ सुख-भंडार गे

पिपरौन गामक झिझिया, देखय सगरो संसार गे

(झिझिया, झिझिया)

माता रानी के भक्ति में, झूमय मिथिला परिवार गे

जय-जय दुर्गा, जय-जय काली, जय मिथिला संसार गे

(हो... हो...)

(जय माता दी...)

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