
Maa Durga Ki Aarti
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जय माता दी, जय माता दी,
बोलो जय स्कंदमाता दी।
भक्ति के दीप जलाएँ हम,
माँ के चरणों में शीश झुकाएँ हम॥
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
जय माँ स्कंदमाता, जय सुखदाता,
जय जगजननी, जय भाग्यविधाता॥
हे माँ, आज तुम्हारा पावन दिन,
भक्ति से भर जाए हमारा मन।
तेरे नाम की ज्योति जलाएँ,
प्रेम से तेरा गुणगान सुनाएँ॥
जय जय माँ, जय जय माँ,
दया की सागर, जय जय माँ।
जय जय माँ, जय जय माँ,
भक्तों की माता, जय जय माँ॥
[भाग दो — माँ का दिव्य स्वरूप | दो:शून्य–चार:शून्य]
कमल के आसन पर माँ विराजे,
मुख पर तेरे तेज सुहाए।
गोद में बाल कार्तिकेय को लेकर,
ममता की अम्रित धारा बहाए॥
चार भुजाओं वाली माता,
भक्तों के मन को हर्षित करती।
तेरी सुंदर छवि जो देखे,
उसके मन में श्रद्धा भरती॥
सिंह की शक्ति, कमल की शान,
तेरे चरणों में चारों धाम।
तेरी महिमा अपरंपार,
जय अम्बे माँ, जय जगदाधार॥
स्वर्ण मुकुट सिर पर चमके,
तेरे नयनों में प्रेम दमके।
लाल चुनरिया, रूप निराला,
माँ तूने जग को संभाला॥
जय जय स्कंदमाता भवानी,
जय जगदम्बे कल्याणकारी।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
माँ हम तेरा गुणगान सुनाएँ॥
[भाग तीन — संतान सुख की प्रार्थना | चार:शून्य–छह:शून्य]
ममता की मूरत, माँ जगदम्बे,
तेरी क्रिपा से जीवन महके।
बच्चों के जीवन में सुख भरना,
हर मुश्किल में उनकी रक्षा करना॥
हर माता के मन की सुनना,
हर बच्चे के सपने बुनना।
ग्यान और संस्कार देना,
सच्चाई का उपहार देना॥
बाल कार्तिकेय के संग विराजो,
हम सबके जीवन में सुख साजो।
बच्चों को सद्बुद्धि देना,
अच्छे कर्मों की शक्ति देना॥
माँ, हर घर में प्रेम बढ़े,
आपस में विश्वास बढ़े।
माता-पिता का मान रहे,
हर बच्चे का कल्याण रहे॥
जय स्कंदमाता, ममता की धारा,
तेरे चरणों में जग सारा।
जय स्कंदमाता, क्रिपा बरसाना,
अपने भक्तों को गले लगाना॥
[भाग चार — सुख, शांति और सम्रिद्धि | छह:शून्य–आठ:शून्य]
माँ, मेरे घर में शांति रखना,
प्रेम का सुंदर दीप जलाना।
मन से क्रोध और द्वेष मिटाना,
सबको मिल-जुलकर रहना सिखाना॥
जहाँ निराशा, आशा देना,
टूटे मन को विश्वास देना।
जहाँ अँधेरा, ज्योति जलाना,
भटके मन को राह दिखाना॥
मेहनत करने की शक्ति देना,
सच्चे कर्मों का फल देना।
कठिन समय में धैर्य बनाएँ,
अपने कर्तव्य सदा निभाएँ॥
तेरी क्रिपा का दीप जले,
हर आँगन में खुशियाँ पलें।
अन्न-धन से घर सम्रिद्ध रहे,
हर मन में संतोष रहे॥
जय जय माँ स्कंदमाता,
तू सबकी भाग्यविधाता।
तेरे नाम की महिमा गाएँ,
प्रेम से तेरे द्वार पर आएँ॥
[भाग पांच — ग्यान और साहस की वंदना | आठ:शून्य–दस:शून्य]
हे माँ, बुद्धि का दीप जला दे,
सत्य की राह हमें दिखा दे।
अग्यान के बादल दूर