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Durga Chalisa Sacred Recitation
Devotional

Durga Chalisa Sacred Recitation

Manju sinhaManju sinha
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Style: Traditional Hindu Durga Chalisa recitation, devotional female lead vocal, clear Sanskrit and Hindi pronunciation, calm and powerful temple chanting, authentic Indian devotional atmosphere, medium-slow steady rhythm, soft harmonium, gentle tabla, manjira and temple bells, subtle tanpura drone, consistent melodic recitation, no pop music, no cinematic soundtrack, no EDM, no romantic singing, no excessive vocal ornaments, preserve every original word and verse, complete uninterrupted Durga Chalisa path, respectful sacred mood, clean studio audio., female vocal
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॥ श्री दुर्गा चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

॥ चौपाई ॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भ्रिकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लय कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि रिषि मुनिन उबारा॥

धरा रूप नरसिंह को अम्बा।

प्रगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।

तिहुँ लोक में डंका बाजत॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।

रक्तबीज शंखन संहारे॥

महिषासुर न्रिप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अमरपुरी अरु बासव लोका।

तव महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।

जन्म मरण ताको छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।

काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहि सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।

शक्ति गई तब मन पछतायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी

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