
Divya Sharanam Prabhu
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
श्री दुर्गा चालीसा
Style-Genre: Traditional Maa Durga Bhajan / Devi Chalisa
Vocal Arrangement
Male Voice: गहरी, गंभीर, ओजस्वी और स्पष्ट।
Female Voice: मधुर, भावपूर्ण, भक्तिमय।
दोनों आवाज़ें लगातार साथ न गाएँ; Male → Female → Both call-and-response रखें।
मुख्य शब्दों पर dynamic accent:
“दुर्गे”, “अम्बे”, “माँ”, “भवानी”, “शक्ति”, “कालिका”, “महिषासुर”, “जय जगदम्ब”, “शरण”
“जय जय जय जगदम्ब भवानी” पर दोनों स्वर ऊँची आवाज़ में।
हर चौपाई के बीच लगभग शून्य.पांच–एक सेकंड का छोटा devotional pause।
बहुत तेज़ pronunciation न हो।
शब्द स्पष्ट रहें और चालीसा का पाठ समझ में आए।
Instruments
तानपुरा + हारमोनियम + बाँसुरी + संतूर + तबला + ढोलक + मंजीरा + करताल/खड़ताल + मंदिर घंटियाँ + घुँघरू + शंख + soft devotional strings/pad
श्री दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ एक ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहू लोक फैली उजियारी ॥ दो ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भ्रिकुटि विकराला ॥ तीन ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ चार ॥
तुम संसार शक्ति लय कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ पांच ॥
अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ छह ॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ सात ॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ आठ ॥
रूप सरस्वती का तुम धारा ।
दे सुबुद्धि रिषि मुनिन उबारा ॥ नौ ॥
धरा रूप नरसिंह को अंबा ।
परगट भयि फाड के खंबा ॥ दस ॥
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ ग्यारह ॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
श्री नारायण अंग समाहीम् ॥ बारह ॥
क्षीरसिंधु में करत विलासा ।
दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ तेरह ॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥ चौदह ॥
मातंगी धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ पंद्रह ॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ सोलह ॥
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ सत्रह ॥
कर में खप्पर खडग विराजे ।
जाको देख काल डर भाजे ॥ अठारह ॥
तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ उन्नीस ॥
नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ बीस ॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥ इक्कीस ॥
महिषासुर न्रिप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ बाईस ॥
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ तेईस ॥
पडी भीढ संतन पर जब जब ।
भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ चौबीस ॥
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब कहें अशोका ॥ पच्चीस ॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ छब्बीस ॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावे�