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Kings of the Ashes
Orchestral

Kings of the Ashes

Ritu SoodRitu Sood
0 likes1 plays3:34
Style: male vocal, epic
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Lyrics

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राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आग्या बिनु पैसारे॥इक्कीस॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥बाईस॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनहूँ लोक हाँक तें काँपै॥तेईस॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥चौबीस॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥पच्चीस॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥छब्बीस॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥सत्ताईस॥

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥अट्ठाईस॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥उनतीस॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥तीस॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥इकतीस॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥बत्तीस॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥तैंतीस॥

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥चौंतीस॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥पैंतीस॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥छत्तीस॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं। क्रिपा करहु गुरुदेव की नाईं॥सैंतीस॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥अड़तीस॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्ध साखी गौरीसा॥उनतालीस॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्रिदय मंह डेरा॥चालीस॥

॥ दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, ह्रिदय बसहु सुर भूप॥

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