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पवनसुत चालीसा अमृतवाणी
Devotional

पवनसुत चालीसा अमृतवाणी

Sarvottam SharmaSarvottam Sharma
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(हो...)

(शंख ध्वनि के साथ मंदिर की घंटियाँ)

(ॐ...)

श्रीगुरु चरन सरोज रज

निज मनु मुकुरु सुधारि

बरनउँ रघुबर बिमल जसु

जो दायकु फल चारि

(बुद्धिहीन तनु जानिके)

सुमिरौं पवन-कुमार

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं

हरहु कलेस बिकार

जय हनुमान ग्यान गुन सागर

जय कपीस तिहुं लोक उजागर

रामदूत अतुलित बल धामा

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा

(जय हनुमान...)

महावीर बिक्रम बजरंगी

कुमति निवार सुमति के संगी

कंचन बरन बिराज सुबेसा

कानन कुंडल कुंचित केसा

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे

काँधे मुंज जनेऊ साजे

(जय हनुमान...)

संकर सुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जग बंदन

विद्यावान गुनी अति चातुर

राम काज करिबे को आतुर

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मन बसिया

(जय हनुमान...)

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा

विकट रूप धरि लंक जरावा

भीम रूप धरि असुर संहारये

रामचन्द्र के काज संवारये

लाय सजीवन लखन जियाये

श्री रघुबीर हरषि उर लाये

(जय हनुमान...)

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा

(जय हनुमान...)

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते

क कवि कोविद कह सके कहाँ ते

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा

राम मिलाय राज पद दीन्हा

तुम्रो मन्त्र विभीषण माना

लंकेश्वर भए सब जग जाना

(जय हनुमान...)

युग सहस्र योजन पर भानू

लिल्यो ताहि मधुर फल जानू

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं

दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्रे तेते

(जय हनुमान...)

राम दुआरे तुम रखवारे

होत

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