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Kalam Bolegi Tab Badlav Hoga
Rap

Kalam Bolegi Tab Badlav Hoga

S
SUBHAM SINHA
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Lyrics

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(हो...)

ये ख़ामोशी नहीं, तूफ़ान की शुरुआत है

हर दबे हुए दिल में आग है

कुर्सी के लिए खेला जाता खेल

सच बोलने वालों पर सवालों की जेल

ताकत के नशे में इंसानियत बेहाल

कमज़ोरों को कुचलकर बनते महान

चारों तरफ़ लूट, चारों तरफ़ शोर

न्याय माँगो तो बंद हर दरवाज़ा और

किसके हाथ सत्ता, किसके हाथ कानून

गरीबों के हिस्से बस दर्द और जुनून

हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं

सच की आवाज़ को अब दबने देंगे नहीं

हाथों में कलम, दिल में इंकलाब

(इंकलाब, इंकलाब)

नफ़रत नहीं चाहिए, चाहिए इंसाफ़

छात्रों के कंधों पर बंदूक मत रखो

सुनहरे कल को बारूद मत करो

जिन हाथों में किताबें, वो हथियार क्यों उठाएँ

जिन आँखों में सपने, वो डर में जी पाएँ

हर युवा है भविष्य की पहचान

उसकी कलम में ताकत, हौसलों में जान

जो कमज़ोरों को सताए, वो ताकतवर नहीं

जो सच के साथ खड़ा हो, उससे बढ़कर कोई नहीं

हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं

सच की आवाज़ को अब दबने देंगे नहीं

हाथों में कलम, दिल में इंकलाब

(हर दिल में इंकलाब)

नफ़रत नहीं चाहिए, चाहिए इंसाफ़

आवाज़ उठेगी, हर दीवार हिलेगी

झूठ की ये दुनिया एक दिन बदलेगी

हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं

सच की आवाज़ को अब दबने देंगे नहीं

हाथों में कलम, दिल में इंकलाब

(इंकलाब, इंकलाब)

नफ़रत नहीं चाहिए, चाहिए इंसाफ़

याद रखना...

युवा को हथियार नहीं, अधिकार दो

उसके हाथों में बंदूक नहीं, किताब दो

(हो...)

(क्योंकि जब कलम बोलती है...)

(तब बदलाव आता है...)

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