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اصحى يا صاحبي

اصحى يا صاحبي

Ahmed Ma3touQAhmed Ma3touQ
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Lyrics

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(हो...)

(ओ... ओ...)

जाग अपने लिए अब

हक़ तेरा है पुकार

दरवाज़े तक न आएगा

जब तक तू न करे प्रहार

जाग अब जाग, अधिकार बुलाए

बेच मत कल को, आज है भाए

चुप्पी नहीं समझदारी, डर नहीं सुरक्षा

जो छोड़े अपना हक़, पछताएगा हर पल

(जाग अब जाग...)

(हक़ तेरा पुकारे...)

कहा उन्होंने चुप रह, यही है नजात

जब तक हक़ गया, कहानियाँ मरी बात

बेचा जिसने ज़मीर, थोड़े पैसों के लिए

सच सामने आएगा, चाहे जितना बड़ा वो दिखे

हर ऊँचा नहीं महान, हर मशहूर नहीं बड़ा

कुछ लोगों की ज़ुबान सोना, कुछ की बस ढोल बजाना

(सोना, सोना...)

(ढोल बजाना...)

जाग अब जाग, अधिकार बुलाए

बेच मत कल को, आज है भाए

चुप्पी नहीं समझदारी, डर नहीं सुरक्षा

जो छोड़े अपना हक़, पछताएगा हर पल

(जाग अब जाग...)

(अधिकार बुलाए...)

खोज, समझ, पूछ हर सवाल का जवाब

मत चल बिना सोचे, मत मान हर दिखावा

हाथ मिला किसी का, पर दिमाग़ अपना रख

इंतज़ार मत कर किसी बहादुर का, खुद बन वो पल

कानून से ले अपना हक़, आवाज़ से ले सम्मान

जागरूकता पहला कदम, बदलने का है अंजाम

(पहला कदम...)

(बदलाव का रास्ता...)

ना अग्यान को, ना हार को!

ना डर को, ना झूठे ख़्वाब को!

जाग अब जाग, अधिकार बुलाए

बेच मत कल को, आज है भाए

चुप्पी नहीं समझदारी, डर नहीं सुरक्षा

जो छोड़े अपना हक़, पछताएगा हर पल

(जाग अब जाग...)

(अधिकार बुलाए...)

जाग... जाग... जाग...

(जाग...)

हक़... हक़... हक़...

(हक़...)

जाग...

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