Back to home
Ananda Sagara Tarangini
Ambient

Ananda Sagara Tarangini

A
Amol Krishna Manjrekar
0 likes1 plays6:32
Style: Genre: Indian Devotional / Classical, Vocal: Female solo, natural Indian voice Language: Sanskrit / Devanagari, if supported Tempo: 65–75 BPM Instruments: Veena, tanpura, bansuri, mridangam Mood: Divine, peaceful, meditative Vocal clarity: Highest available Audio quality: Highest available Duration: Longest available; extend through complete cycles
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Pro & Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये

मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते ।

पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ १ ॥

अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये

क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥ २ ॥

जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये

सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते ।

भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धैर्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ ३ ॥

जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये

रथगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते ।

हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥ ४ ॥

अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये

गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि, स्वरसप्त भूषित गाननुते ।

सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम् ॥ ५ ॥

जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये

अनुदिन-मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते ।

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्करदेशिक मान्यपदे

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥ ६ ॥

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये

मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे ।

नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ॥ ७ ॥

धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमि, दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये

घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।

वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥ ८ ॥

अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।

विष्णुवक्षः स्थला-रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥

शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणि ते जयः ।

जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!