
मैं समय हूँ Part 1
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Lyrics
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[Cosmic Intro – Deep Male Voice, Whispering Choir]
ओम्...
अनन्त...
अनादि...
असीम...
सुनो...
हे प्रिथ्वी के वासियो...
आज मैं तुम्हें...
अपनी एक ऐसी कहानी सुनाऊँगा...
जिसका कोई आरम्भ नहीं...
जिसका कोई अन्त नहीं...
मैं हूँ...
तुम्हारे जन्म से पहले भी...
तुम्हारी अंतिम साँस के बाद भी...
मैं हूँ...
तुम्हारे हर प्रश्न के पीछे छिपा हुआ मौन...
मैं हूँ...
ब्रह्मांड...
और आज...
मैं बोल रहा हूँ...
[Verse 1]
जब पहली बार...
शून्य ने आँखें खोलीं...
जब पहली बार...
ऊर्जा ने करवट ली...
जब अनन्त अंधकार के सीने में...
प्रकाश की पहली लहर उठी...
तब न कोई नाम था...
न कोई पहचान थी...
न धरती थी...
न आकाश था...
न जीवन था...
न म्रित्यु थी...
केवल एक रहस्य था...
एक ऐसी अनन्त यात्रा...
जिसे आज तक...
कोई पूरी तरह समझ नहीं पाया...
और उसी यात्रा के भीतर...
एक दिन...
तुम जन्मे...
[Orchestral Rise – Choir]
ओ...
अनन्त...
अनन्त...
कहाँ से आए तुम?
कहाँ तुम्हें जाना है?
किस सत्य की खोज में...
तुमने यह जीवन पाया है?
ओ...
सुनो मेरी आवाज़...
मैं तुम्हारे भीतर भी हूँ...
मैं तुम्हारे बाहर भी हूँ...
तुम मुझे खोजते हो सितारों में...
और मैं तुम्हें खोजता हूँ...
तुम्हारे विचारों में...
[Verse 2]
मैंने समय को...
धीरे-धीरे चलते देखा...
पत्थरों को...
पहाड़ बनते देखा...
महासागरों को...
महाद्वीपों से टकराते देखा...
आग से जन्मी धरती को...
जीवन से सजते देखा...
फिर उसी जीवन को...
अपने अस्तित्व के लिए...
संघर्ष करते देखा...
एक छोटी-सी धड़कन...
एक विशाल संसार के भीतर...
एक छोटी-सी साँस...
अनन्त आकाश के नीचे...
और उस छोटी-सी साँस में...
छिपा हुआ है...
एक ऐसा चमत्कार...
जिसे तुम...
अक्सर साधारण समझकर...
भूल जाते हो...
[Pre]
तुम्हें जो मिला...
वह हमेशा नहीं रहेगा...
तुम्हारे हाथों में...
समय ठहर नहीं सकेगा...
जिस सुबह को तुम...
साधारण समझकर जीते हो...
किसी और के लिए...
वही सुबह...
एक अधूरा सपना हो सकती है...
[Massive Chorus – Epic Male Choir]
मैं हूँ समय!
मैं हूँ साक्षी!
मैंने युगों की...
कहानी लिखी!
राजा आए!
राजा गए!
सिंहासन टूटे!
साम्राज्य ढहे!
मैं फिर भी...
चलता रहा!
मैं फिर भी...
बढ़ता रहा!
मैं हूँ अनन्त!
मैं हूँ अपार!
मैं ही प्रश्न हूँ!
मैं ही विचार!
ओ...
ब्रह्मांड!
ब्रह्मांड!
सुनो...
मेरी पुकार!