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Stillness in Durga's Grace
Ambient

Stillness in Durga's Grace

M
Madhav Goswami
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Style: Extremely slow, peaceful Mahishasura Mardini Stotram, soft female Sanskrit vocals, hypnotic meditative chanting, only occasional gentle sitar and temple bells. No other instruments, no drums, no dramatic buildup. Pure, serene devotional atmosphere.
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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिक्रिते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥एक॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते

त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते

दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दो॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते

शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय श्रिङ्गनिजालय मध्यगते।

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥तीन॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते

रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड म्रिगाधिपते।

निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥चार॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभ्रिते

चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतक्रित प्रमथाधिपते।

दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत क्रितान्तमते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥पांच॥

अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे

त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोधिक्रितामल शुलकरे।

दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीक्रित दिङ्मकरे

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥छह॥

अयि निजहुङ्क्रिति मात्रनिराक्रित धूम्रविलोचन धूम्रशते

समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते।

शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥सात॥

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके

कनकपिशङ्ग प्रिषत्कनिषङ्ग रसद्भटश्रिङ्ग हताबटुके।

क्रितचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥आठ॥

सुरललना ततथेयि तथेयि क्रिताभिनयोदर न्रित्यरते

क्रित कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते।

धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर म्रिदंग निनादरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥नौ॥

जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते

झणझणझिञ्झिमि झिङ्क्रित नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते।

नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दस॥

अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते

श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रव्रिते।

सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर

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