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Veera Bhakti Jwalamukhi
Cinematic Rock

Veera Bhakti Jwalamukhi

Amit NakodAmit Nakod
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Style: Epic cinematic South Indian temple rock, high-energy Vedic fusion, powerful authoritative female classical lead vocalist with a massive thunderous male background chorus singing in crisp unison, fast-paced driving 110 BPM tempo. Continuous rich acoustic Tanpura drone in G minor, thunderous traditional chenda and dhol drum rhythms, sweeping intense dramatic orchestral string sections building a grand majestic crescendo, sharp metallic temple cymbals (elathalam) clashing cleanly on the downbeats. Awe-inspiring, victorious, heroic sacred atmosphere, lush rich room reverb.
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Lyrics

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[verse 1]

अयि गिरिनन्दिनी नन्दितमेदिनी विश्वविनोदिनी नन्दिनुते

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनी विष्णुविलासिनी जिष्णुनुते।

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनी भूरिकुटुम्बिनी भूरिकृते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥एक॥

[verse 2]

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते

त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते

दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दो॥

[verse 2]

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते

शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते।

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रसरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥तीन॥

[verse 4]

अयि शतखण्ड विक्षण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते

रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते।

निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥चार॥

[verse 5]

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते

चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते।

दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदूत कृतान्तमते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥पांच॥

[verse 6]

अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवरभय दायकरे

त्रिभुवनमस्तक शूलविरोधि शिरोधिकृतामल शूलकरे।

दुमिदुमितामर धुन्धुभिनादमहोमुखरीकृत दीन्मकरे

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥छह॥

[verse 7]

अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते

समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते।

शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥सात॥

[verse 8]

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके

कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके।

कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥आठ॥

[verse 9]

सुरललना ततथेयि ततथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते

कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते।

धुधुकुट धुक्कुट धिम्धिमित ध्वनि धीर मृदङ्ग निनादरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥नौ॥

[verse 10]

जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते

झणझणझिन्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते।

नतित नतार्ध नति नत नायक नाटितनाट्य सुगानरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दस॥

[verse 11]

अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते

श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते।

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