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दुर्गा कवच अमृत वाणी
Devotional

दुर्गा कवच अमृत वाणी

VANSHI CHANDRAVANSHI CHANDRA
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Lyrics

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[Intro]

(हो...)

(ओ...)

[Verse]

रिषि मार्कंडय ने पूछा तभी

दया करके ब्रह्माजी बोले सभी

गुप्त मंत्र है जो संसार में

सब शक्तियां जिसके अधिकार में

[Verse]

पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का

हर काम पूरे करे सवाली का

सुनो मार्कंडय मैं समझाता हूँ

नवदुर्गा के नाम बतलाता हूँ

[Chorus]

जय जय जय महारानी की

(जय दुर्गा)

जय दुर्गा अष्ट भवानी की

(जय माता)

नव दुर्गा का कवच जो गाए

उस पे कभी कष्ट न आए

[Verse]

पहली शैलपुत्री कहलावे

दूसरी ब्रह्मचरिणी मन भावे

तीसरी चंद्रघंटा शुभ नाम

चौथी कुश्मांडा सुखधाम

[Verse]

पांचवीं अस्कंद माता

छठी कात्यायनी विख्याता

सातवीं कालरात्रि महामाया

आठवीं महागौरी जग जाया

[Chorus]

जय जय जय महारानी की

(जय दुर्गा)

जय दुर्गा अष्ट भवानी की

(जय माता)

नव दुर्गा का कवच जो गाए

उस पे कभी कष्ट न आए

[Bridge]

नौवीं सिद्धिरात्रि जग जाने

नव दुर्गा के नाम बखाने

महासंकट में बन में रण में

रक्षा करे माँ हर पल में

[Chorus]

जय जय जय महारानी की

(जय दुर्गा)

जय दुर्गा अष्ट भवानी की

(जय माता)

नव दुर्गा का कवच जो गाए

उस पे कभी कष्ट न आए

[Outro]

(जय माता दी...)

(हो...)

(जय दुर्गा...)

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