
Narmada Ka Lahu
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Lyrics
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[Intro]
नर्मदा के किनारे…
एक नाम गूँजता था।
माहिष्मती…
और उस नाम के पीछे—
एक सम्राट।
सहस्रबाहु अर्जुन।
[BEAT ENTERS — DEEP BASS + RAW DHOl]
[Chorus]
माहिष्मती… नाम याद रखना,
अर्जुन का वो दौर याद रखना।
हजार भुजाओं की गाथा है,
इस मिट्टी का इतिहास याद रखना।
सहस्रबाहु…
नाम नहीं, एक अध्याय।
सहस्रबाहु…
गूँजे नर्मदा के पार।
[Verse 1]
नर्मदा का पानी, पत्थरों की जुबानी,
किस्से पुराने, पर शान राजसी।
हैहयवंश का दौर, मुकुट पे नूर,
अर्जुन का दरबार, निगाहें दूर।
ना ये कल की बात, ना कोई अफसाना नया,
पीढ़ियों ने अपने ढंग से इस नाम को जिया।
कहीं शौर्य की कथा, कहीं भक्ति का मान,
दत्तात्रेय की क्रिपा से जुड़ा उनका आख्यान।
[PRE]
ज़रा ढोल बजा…
ज़रा शंख बजा…
माहिष्मती का नाम फिर सजा!
[Chorus]
माहिष्मती… नाम याद रखना,
अर्जुन का वो दौर याद रखना।
सहस्रबाहु! सहस्रबाहु!
नर्मदा के तट की गूँज याद रखना।
[Verse 2]
किरदार विशाल, और अंदाज़ शाही,
गाथा पुरानी, मगर गूँज गहरी।
हजार भुजाएँ—प्रतीक अपार बल का,
नाम जो उभरा एक पूरे काल का।
रावण से जुड़ी कथाएँ भी मशहूर,
पुराणों के पन्नों में किस्से भरपूर।
इतिहास, परंपरा—दोनों का मान,
सुन किस्से, समझ, फिर कर अभिमान।
[Bridge]
जय अर्जुन… जय अर्जुन…
माहिष्मती के राजन!
जय अर्जुन… जय अर्जुन…
नर्मदा के राजन!
[FINAL VERSE — BEAT SWITCH]
ना बस ताज की बात, ना तलवार का शोर,
एक नाम जो सदियों से चला आ रहा और।
अपनी जड़ों को पहचानने की पुकार,
सहस्रबाहु अर्जुन—जय-जयकार!
[Outro]
माहिष्मती…
सहस्रबाहु अर्जुन।
नाम याद रखना।