Back to home
Untitled

Untitled

Tushar BhamareTushar Bhamare
0 likes1 plays8:12
Style: Devotional Hindu bhajan, warm soulful male vocals with a soothing medium pitch and clear Hindi diction. Driven by a continuous hypnotic Tanpura drone and a gentle acoustic Tabla rhythm playing a soft, steady medium tempo groove (80 BPM). Pristine traditional Indian devotional production, serene, peaceful temple courtyard atmosphere, smooth hall reverb.

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Pro & Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊँ रघु-बर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धीहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार । बल बुद्धी विदया देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ जय हनुमान ग्यान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे । काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥ शंकर suवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ विदयावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ॥ रघु-पति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस्र बदन तुमरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥ तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकारा । हरीहु राज मिलि प-द दीन्हा ॥ तुमरो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ युग सहस्र योजन पर भानू । लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुमरे तेते ॥ राम दुवारे तुम रखवारे । होत न आग्या बिनु पैसारे ॥ सब सुख लहै तुम्हारी शरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥ आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासे रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत वीरा ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ और मनो-रथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धी नौ निधी के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्हारे पासा । सदा रहो रघु-पति के दासा ॥ तुमरे भजन राम को पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥ अंतकाल रघु-बर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ जै जै जै हनुमान कृपा करहु गुरुदेव की नाँहिं ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्द साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहू सुर भूप ॥

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!