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Tushar Bhamare

Untitled
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Style: Devotional Hindu bhajan, deep warm male vocals, perfect clear Hindi pronunciation, no accent, accompanied ONLY by solo acoustic Bansuri flute melody. Strictly no drums, no tabla, no percussion, no tanpura. Slow tempo 60 BPM, deeply peaceful, meditative, serene, spacious hall reverb.
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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार ।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे । काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर संहाररे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरंगि हरषि उर लाए ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥
सहस्र बदन तुमरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । कवि कोविद कहि सकé कहाँ ते ॥
तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकारें । सुराज मिलि राज पद दीन्हें ॥
उमरो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥
युग सहस्र योजन पर भानू । लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुमरे तेते ॥
राम दुवारे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहै तुम्हारी शरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिशाच निकट नहीं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥
नासे रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत वीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हारे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥
तुमरे भजन राम को पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥
अंतकाल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान कृपा करहु गुरुदेव की नाँहिं ॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्द साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहू सुर भूप ॥