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Tushar BhamareTushar Bhamare
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Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार । बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे । काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥ शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहाररे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरंगि हरषि उर लाए ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस्र बदन तुमरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते । कवि कोविद कहि सकé कहाँ ते ॥ तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकारें । सुराज मिलि राज पद दीन्हें ॥ उमरो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ युग सहस्र योजन पर भानू । लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुमरे तेते ॥ राम दुवारे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुख लहै तुम्हारी शरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥ आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ नासे रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत वीरा ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्हारे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुमरे भजन राम को पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥ अंतकाल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ जै जै जै हनुमान कृपा करहु गुरुदेव की नाँहिं ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्द साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहू सुर भूप ॥

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