
Raakh Se Uthna
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अधूरे सपने
[Intro]
रातों को जागता हूँ…
खुद से ही बातें करता हूँ,
सब कहते हैं मैं कुछ नहीं कर पाऊँगा…
पर मैं अभी भी अपने सपनों पे मरता हूँ।
[Verse 1]
घर की वो बातें दिल में रह जाती हैं,
मुस्कुराहट के पीछे आँखें कह जाती हैं,
“तू क्या करेगा?” — रोज़ सुनता हूँ मैं,
अपनों के ताने भी चुप-चाप सहता हूँ मैं।
किसी को नहीं दिखता, अंदर क्या चल रहा,
सपनों का बोझ है, फिर भी मैं चल रहा,
कहते हैं छोड़ दे, ये तेरे बस का नहीं,
पर दिल कहता है — रुकना अभी सही नहीं।
मैंने भी देखे थे कुछ बड़े ख्वाब,
अपना नाम हो, अपनी एक पहचान हो खास,
पर हालात ने हर बार रोक दिया,
जो था मेरा सपना… वक़्त ने तोड़ दिया।
[Pre]
कभी लगता है सब कुछ छोड़ दूँ,
खुद से भी अपना रिश्ता तोड़ दूँ,
फिर अंदर से आवाज़ आती है—
“तू गिरा है… खत्म नहीं हुआ।”
[Chorus]
मेरे सपने अधूरे हैं, पर ज़िंदा हैं अभी,
मेरी आँखों में आँसू हैं, पर हिम्मत है अभी,
घर के ताने सुन-सुन के थक गया हूँ मैं,
पर एक दिन कहूँगा—
“देखो… मैं रुका नहीं।”
मेरे सपने अधूरे हैं, कहानी बाकी है,
जो दुनिया ने हरा दिया, मेरी ज़िद बाकी है,
आज चाहे कोई मेरा नाम न जाने,
कल मेरी मेहनत खुद मेरी पहचान बनेगी।
[Verse 2]
कभी पैसे की कमी, कभी लोगों की बातें,
कभी अपनों के सवाल, कभी अपनी ही रातें,
हर दिन खुद को थोड़ा और तोड़ता रहा,
फिर भी सुबह उठके खुद को जोड़ता रहा।
माँ की फिक्र, घर वालों की उमीदें,
और मेरी आँखों में कुछ अलग ही तस्वीरें,
मैं गलत नहीं था, बस रास्ता अलग था,
मेरा वक़्त बुरा था… मेरा सपना नहीं।
जिनके ताने आज मेरे सीने में हैं,
कल वही लफ़्ज़ मेरी जीत के किस्से में हैं,
मैं बदला लेने नहीं, कुछ बनने निकला हूँ,
जो कल था खामोश… आज बोलने निकला हूँ।
[Bridge]
अगर मैं हार गया…
तो शायद सब सही कह रहे थे,
लेकिन अगर मैं जीत गया…
तो मेरी खामोशी का जवाब होगा।
[Chorus]
मेरे सपने अधूरे हैं, पर ज़िंदा हैं अभी,
मेरी आँखों में आँसू हैं, पर हिम्मत है अभी,
घर के ताने सुन-सुन के थक गया हूँ मैं,
पर एक दिन कहूँगा—
“देखो… मैं रुका नहीं।”
आज जो कहते हैं, “तू कुछ नहीं करेगा,”
कल वही पूछेंगे, “तू इतना आगे कैसे गया?”
मैंने दर्द को अपनी ताकत बना लिया,
और अधूरे सपनों को…
अपनी वजह बना लिया।
[Outro]
कुछ सपने वक़्त लेते हैं…
कुछ ज़ख्म भी।
बस एक चीज़ ज़रूरी है—
खुद पे यकीन।