
Shri Hanuman Kripa Amrit
PRO & Creator Features
Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).
Audio2Audio Remix
Pro & Creator
Voice Clone
Pro & Creator
Create Variations
Creator only
Edit Sections
Creator only
Stem Separation
Creator only
Lyrics
▶ Play this song to follow along.
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिक्रिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ एक ॥
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि कल्मषमोषिणि घोररते । [किल्बिष]
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ दो ॥
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय श्रिङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ तीन ॥
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड म्रिगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते [-चण्ड]
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ चार ॥
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभ्रिते
चतुरविचारधुरीण महाशिव दूतक्रित प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशय दुर्मति दानवदूत क्रितान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ पांच ॥
अयि शरणागत वैरिवधूवर वीरवराभयदायकरे
त्रिभुवन मस्तक शूलविरोधि शिरोधिक्रितामल शूलकरे ।
दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद महो मुखरीक्रित तिग्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ छह ॥
अयि निजहुङ्क्रितिमात्र निराक्रित धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिव शिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ सात ॥
धनुरनुसङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनक पिशङ्ग प्रिषत्कनिषङ्गरसद्भट श्रिङ्ग हतावटुके ।
क्रितचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ आठ ॥
सुरललना ततथेयि तथेयि क्रिताभिनयोदर न्रित्यरते
क्रित कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिन्धिमित ध्वनि धीर म्रिदङ्ग निनादरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ नौ ॥
जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुति तत्पर विश्वनुते
भण भण भिञ्जिमि भिङ्क्रितनूपुर सिञ्जितमोहित भूतपते । [झ]
नटितनटार्ध नटीनटनायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ दस ॥
अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते
श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी रजनीकर वक्त्रव्रिते