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Shri Hanuman Kripa Amrit
Ambient

Shri Hanuman Kripa Amrit

Pahe PooPahe Poo
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Style: Soulful Indian devotional rendition of Hanuman Chalisa, warm expressive male vocals with immaculate Hindi and Awadhi pronunciation, natural classical ornamentation, gentle tanpura, bansuri, sarangi, veena, tabla, soft pakhawaj, temple bells and delicate manjira. Modern cinematic ambience, warm sub-bass, subtle lo-fi textures and spacious reverb. Slow emotional invocation, flowing melodic verses in gentle Keharwa rhythm, gradually expanding instrumentation, uplifting devotional crescendo, layered male chorus, then a peaceful acoustic ending. Sacred, deeply moving, intimate and timeless. No aggressive singing, Western trap, EDM or excessive vocal effects. Every word must remain clear.
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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिक्रिते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ एक ॥

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते

त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि कल्मषमोषिणि घोररते । [किल्बिष]

दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ दो ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते

शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय श्रिङ्गनिजालय मध्यगते ।

मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ तीन ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते

रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड म्रिगाधिपते ।

निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते [-चण्ड]

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ चार ॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभ्रिते

चतुरविचारधुरीण महाशिव दूतक्रित प्रमथाधिपते ।

दुरितदुरीह दुराशय दुर्मति दानवदूत क्रितान्तमते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ पांच ॥

अयि शरणागत वैरिवधूवर वीरवराभयदायकरे

त्रिभुवन मस्तक शूलविरोधि शिरोधिक्रितामल शूलकरे ।

दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद महो मुखरीक्रित तिग्मकरे

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ छह ॥

अयि निजहुङ्क्रितिमात्र निराक्रित धूम्रविलोचन धूम्रशते

समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।

शिव शिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ सात ॥

धनुरनुसङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके

कनक पिशङ्ग प्रिषत्कनिषङ्गरसद्भट श्रिङ्ग हतावटुके ।

क्रितचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ आठ ॥

सुरललना ततथेयि तथेयि क्रिताभिनयोदर न्रित्यरते

क्रित कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।

धुधुकुट धुक्कुट धिन्धिमित ध्वनि धीर म्रिदङ्ग निनादरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ नौ ॥

जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुति तत्पर विश्वनुते

भण भण भिञ्जिमि भिङ्क्रितनूपुर सिञ्जितमोहित भूतपते । [झ]

नटितनटार्ध नटीनटनायक नाटितनाट्य सुगानरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ दस ॥

अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते

श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी रजनीकर वक्त्रव्रिते

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