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Raag Agni Shanti
Energetic

Raag Agni Shanti

Akash TamrakarAkash Tamrakar
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Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional, Heavy bass, Soulful vocals, Melodic, Energetic, male vocal, powerful vocals, brass, strings, aggressive, peaceful, uplifting

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श्री सहस्रबाहु अरजुनस्तूत्रम्

श्री गरनेशायनम्

श्रीदत्ता आत्रे आयनमा

अत्रिवंशसमुद्भूतं विश्वंशंतेजसानिधिं

दत्ता आत्रेयं गुरुनत्वा वक्षामि विरवय भवं

क्रेत वीर्य सुतं वीरं है है कुल भूशनं अर्जुनं सहस्र बाहूं वंदे राजाधी राजकं

दशवर्ष सहस्रानी तपस्तत्वा सुधारुनं दत्तात्रेयम उपासाद लिध्य दिव्यन वरान रिपं

सहस्र बाहुं बनिनं प्रधमं वरमापसा अधर्मनिवारनं चैवा सतारक्षन वेवचा

युद्धेन विजितां भूमिं धर्मेन आईवापि पाले तितितस्या भवत भावो वरश्रेष्ठो महात्मना

रणेशत्रुष्वजे यत्वं मृत्युष्ष्टराद्भवे तैन्वरान ससंप्राहुं वंदेवाभाधिरावशुता

अधर्णनेव स्या शो नर्शेष्ठों महर्लव्हे रा।

युद्धयन द्रूश्व जिदा औमें धर्मेन आई महा विकलें।

इतितस्या भवन भावो परशेष्ठो महात्मना

रणेशत्रुष्व जेयत्वं पृतुषेष्ठत राध्भवेत

तितान्वरांस संप्राप्य पभू अभोई विशुवा

सर्मेन पवती भूमेन सागरर्वाबितायता

जाए ताइटा न्यायमर्गेस्ति दोनित्य राजधर्म परायद।

दशयकस सहसराणी यग्यश्वस महात्मनं अभवन्भूरिदानाणी सुवर्नामयवेदिका।

नश्न द्रम नलभेत यस्य राज नदाजन श्मर्णाने मतस्याशं नश्न द्रव्यं पुनलभेत

नर्मतां बाहु एगे स्थम्भया मासदीलत यस्य बाहु सहस्य नंपेतं पुवन्थयम

माहिश्मत्यम महावीर्यो राज धर्मेव पानया

शोरिणत्यच साचैवा त्रेलों के किर्ति मनबुर्ता

देख्वी जित्यम हिमेता नई बतिन भश्यमाने

देवदान बतन धर्माई पूजित समही बदेव

पर्चाशीति सहसरारी वर्षनां समही पनिव अव्याहता अबल स्रीवन दर्मराज वर्धतेता

यस्य किर्दिर्थिश हसर्वा पूरायत्यत्यत्यसर्वाः यस्यनामस्मरनित्यां तेलिर्च वर्धते

धर में निटिनधरी डाहम देई पुरयंदेई महाबन प्रयाहिते सदा पुद्धि तेई रजेंदर सर्वता

मधरमाद्वारयास्वन धर्ममार्गे नियोजएं

सत्यशावर्यंच दानंच स्वाभिमानाच देगा

सहस्रवाहोराजेंद्र दत्नात्रे अबरप्रड़

वद्पादपद्मभक्तिन्मे

देहिनित्यम महामते

जे जे कार्त वीराई है हायाधी पत ये नमा

जे जे सहसर बाहो धर्म रक्षा करायते

जे जे राजरा जे ग्रण जे वीर महावल

जे दत्ता त्रे भक्ताई जे धर्म पराये नमा

आप गुटे दो पादा दो

जै दीर न गुलापन, जै जगत द्रे अभक्ताएं

जै जगत द्रे अभक्ताएं

जै जै आजना जै जै द्रे जीर अभापन

जय बगत तर्थे अभगत आये

झाल

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