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Untitled

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Mann SinghMann Singh
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Style: Atmospheric devotional ambient, ultra melodic Indian flute, soothing sitar, emotional male vocals, deep warm bass, slow cinematic build, ethereal, mesmerizing, hauntingly beautiful harmony, 90 bpm

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[Intro] [Traditional Flute Solo] [Doha] श्री गुरु चरन सरोज रज। निज मनु मुकुर सुधारि॥ बरनउ रघुबर बिमल जसु। जो दायकु फल चारि॥ [Verse 1] बुद्धि-हीन तनु जानिके। sumिरौ पवन कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहि। हरहु कलेस बिकार॥ [Chorus] जय हनुमान ग्यान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ [Verse 2] महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ [Verse 3] हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥ [Verse 4] बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ [Chorus] सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥ [Interlude] [Ethereal Sitar Solo] [Verse 5] लाय सजीवन लखन जियाए। श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ [Verse 6] सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ [Bridge] [Vocals building up emotionally] जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ [Verse 7] तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ [Verse 8] प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ [Chorus] राम दुआरे तुम रखवारे। होतन आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ [Verse 9] आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ [Verse 10] नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ [Verse 11] सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥ [Chorus] चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे॥ [Interlude] [Soft Flute and Temple Bells] [Verse 12] अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ [Verse 13] तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ [Verse 14] और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ [Bridge] [Vocals becoming stronger and devotional] जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई॥ [Verse 15] जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ [Final Chorus] [Full devotional vocals with tabla, manjira and harmonium] जय हनुमान। जय बजरंगबली। जय पवनसुत हनुमान। जय श्री राम। [Closing Doha] [Music slows down gently] पवनतनय संकट हरन। मंगल मूरति रूप॥ राम लखन सीता सहित। हृदय बसहु सुर भूप॥ [Outro] [Soft Flute Solo] [Temple Bells] [Fade to Silence]

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