Back to home
Breathing Into Dawn
Ambient

Breathing Into Dawn

Santosh SinghSantosh Singh
0 likes1 plays4:00
Style: ambient, pads, atmospheric, ethereal, 70 bpm, meditative, spacious, dreamy, male vocal
Learn to sing thisKaraoke with live pitch — get a score on every lineSing →

PRO & Creator Features

Unlock advanced AI features with Pro (Audio2Audio, Voice Clone, Photo Covers, LoRA) or Creator (Variations, Edit Sections, Stem Separation).

Audio2Audio Remix

Pro & Creator

Voice Clone

Pro & Creator

Create Variations

Creator only

Edit Sections

Creator only

Stem Separation

Creator only

Lyrics

▶ Play this song to follow along.

नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम् ॥ एक॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिराग्यानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं क्रिपालं गुणागारसंसारपारं नतोहम् ॥ दो॥

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटिप्रभाश्रीशरीरम् ।

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनीचारुगङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ तीन॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

म्रिगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥ चार॥

प्रचण्डं प्रक्रिष्टं प्रगल्भं परेशमखण्डमजं भानुकोटिप्रकाशम् ।

त्रयःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ पांच॥

कलातीतकल्याणकल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।

चिदानन्दसन्दोहमोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ छह॥

न यावदुमानाथपादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ सात॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।

जराजन्मदुःखौघतातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीशशम्भो ॥ आठ॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

॥ इति श्रीरामचरितमानसे उत्तरकाण्डे श्रीगोस्वामितुलसीदासक्रितं

श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

Comments(0)

Sign in to join the conversation.

No comments yet. Be the first to comment!