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Sachai Ka Aaina
Hindi Rap

Sachai Ka Aaina

Ramesh MouryaRamesh Mourya
0 likes2 plays3:12
Style: Conscious Hindi rap, dry crystal clear male vocals, no reverb, no choir, subtle minimalist boom-bap beat, 90 bpm, continuous flow, street Hindi lyrics, raw direct delivery.
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Lyrics

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[Verse]

सुबह उठकर माथे पर मैं तिलक लगाता हूँ

दिखावे के लिए बस राम-नाम गाता हूँ

मन्दिर तो जाता हूँ पर दिल में मैल है

दूसरों की नजर में मेरा साफ-सुथरा खेल है

गीता और रामायण की बातें बड़ी करता हूँ

पर असल जिंदगी में बस मैं पाप ही भरता हूँ

झूठ की दुकान मेरी सच से दूर जाती है

अंदर का ये रावण रोज मुझको डराती है

तू खुद को समझता है सबसे बड़ा ग्यानी

पर भीतर से तेरी है खोखली कहानी

दूसरों के पापों पे तू उंगली उठाता है

अपने ही गिरेबान में झाँक न पाता है

नदी में तू कचरा डाल गंगा जल लाता है

ईश्वर को भी अपने ही मतलब में ढालता है

[Verse]

बहन घर से बाहर जाए तो पहरे लगाता हूँ

शहर के माहौल का मैं रोना रोता जाता हूँ

पर खुद मैं ही सड़कों पर आवारा सा घूमूँ

पराई औरतों को देख बुरी नजर से चूमूँ

मोमबत्ती लेकर रातों में इंसाफ माँगता हूँ

पर अपने ही घर में मैं इंसानियत मारता हूँ

दुश्मन को बाहर ढूँढूँ पर दुश्मन तो मैं खुद हूँ

दोगली सी दुनिया का सबसे बड़ा बुद्धू हूँ

नारी के सम्मान की तू बात है बनाता

पर आँख उठाकर तू पराई को सताता

घर की जो इज्जत है वो सबकी ही शान है

तेरी इन हरकतों से शर्मसार इंसान है

तू रूप बदल-बदल कर धोखा सबको देता

औरों के गुनाहों का तू हिसाब है लेता

[Verse]

मांस-मछली खाकर मैं चैन की नींद सोता हूँ

अपने किसी अपने पर फूट-फूट रोता हूँ

गौ-माता के नाम पर मैं नारे खूब लगाता हूँ

पर खाने की थाली में मैं सब भूल जाता हूँ

कुत्ते को प्यार दूँ और मुर्गे को चबाऊँ

दिखावे के प्यार से मैं दुनिया को रिझाऊँ

तू कैसा इंसान है जो खून को बहाता है

भूख की खातिर तू हर जीव को सताता है

काली के नाम पर तू बलि को चढ़ाता है

धर्म की आड़ में तू पाप ही कमाता है

जहाँ दया का पाठ पढ़ाया गया वेदों में

तू वही पाप करता है अपने भेदों में

[Verse]

अब सुन ले मेरे भाई तू होश में आ जा

दूसरों पे उंगली उठाना तू जरा भूल जा

आईना उठा और तू खुद को जरा देख ले

भीतर के रावण को तू खुद ही अब फेंक दे

रास्ते बदलना है तो खुद से शुरुआत कर

झूठे इस दिखावे पर तू करना बंद वार कर

सतयुग कहीं बाहर से उड़ के नहीं आएगा

तू खुद को बदलेगा तभी तो देश बदलेगा

तू आज ही कसम खा कि पाखंड छोड़ेगा

इंसान बनके तू अब रिश्ता नया जोड़ोगे

नफरत की आग को तू पानी से बुझा दे

अपने इस अंदर के पापी को मिटा दे

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