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Untitled

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S
Swara
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Style: Strong, powerful male devotional voice Fast-paced energetic singing, shortest practical duration, Very minimal background music Strong, clear and highly intelligible pronunciation of every word, Very minimal background music,No instrumental music between two consecutive lines of lyrics,Clear Hindi/Sanskrit pronunciation,Do NOT insert instrumental breaks, fills or interludes between individual lyric lines, Avoid excessive vocal ornamentation, Soft tanpura drone, Light tabla/pakhawaj rhythm, Subtle dhol/nagada accents, Very occasional temple bell, Very subtle harmonium support

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[Verse 1] श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। [Chorus] जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।। हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे। कांधे मुंज जनेऊ साजे।। शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंडन (वंदन)।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियाहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाए। श्री रघुबीर हरषि उर लाए।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुमरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोविद कह सके कहाँ ते।। तुम सुग्रहिं (सुग्रीव) कीन्हा उपकारारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुमरो मंत्र विभीषण माना। लंक भए सब जग जो सब जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुमरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।। आपन तेज संहारो आपै। तीनों लोक हांक ते कांपै।। भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नाबै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब तप राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुमरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुमरे भजन राम को भावै। जन्म जन्म के दुख बिसरावै।। अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बदि महासुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होइ सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हर चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।। [Verse 2] पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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