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Bass Bhakti Surge
Bass Music

Bass Bhakti Surge

Arjun SinghArjun Singh
0 likes0 plays1:39
Style: Energetic devotional , Melodic, Heavy bass
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Lyrics

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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते।

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते॥

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिक्रिते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥एक॥

अयि शतखण्डविखण्डितरुण्डवितुण्डितशुण्डगजाधिपते।

रिपुगजगण्डविदारणचण्डपराक्रमशुण्डम्रिगाधिपते॥

निजभुजदण्डनिपातितखण्डविपातितमुण्डभटाधिपते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दो॥

अयि रणदुर्मदशत्रुवधोदितदुर्धरनिर्जरशक्तिभ्रिते।

चतुरविचारधुरीणमहाशिवदूतक्रितीप्रमथाधिपते॥

दुरितदुरीहदुराशयदुर्मतिदानवदूतक्रितीक्रिते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥तीन॥

अयि शरणागतवैरिवधूवरवीरवराभयदायकरे।

त्रिभुवनमस्तकशूलविरोधिशिरोधिक्रितामलशूलकरे॥

दुमिदुमितामरदुन्दुभिनादमहोमुखरीक्रिततिग्मकरे।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥चार॥

अयि निजहुङ्क्रितिमात्रनिराक्रितधूम्रविलोचनधूम्रशते।

समरविशोषितशोणितबीजसमुद्भवशोणितबीजलते॥

शिवशिवशुम्भनिशुम्भमहाहवतर्पितभूतपिशाचरते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥पांच॥

धनुरनुषङ्गरणक्षणसङ्गपरिस्फुरदङ्गनटत्कटके।

कनकपिशङ्गप्रिषत्कनिषङ्गरसद्भटनूकटके॥

क्रितचतुरङ्गबलक्षितिरङ्गघटद्बहुरङ्गरटद्बटुके।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥छह॥

सुरललनाततथेयितथेयितथाभिनयोत्तरन्रित्यरते।

हसकुतकुक्कुटतोककुटः कुकुटाधिपते॥

ध्वनितविलम्बिततालमशब्दिततालसुताललये।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥सात॥

जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुतितत्परविश्वनुते।

भण भण भिञ्जिनि भिङ्क्रितनूपुरसिञ्जितमोहितभूतपते॥

नटितनटार्धनटी नटराजजनार्धनटी नटराजसुते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥आठ॥

सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनीरजनीरजनीरजनी।

सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनीरजनीरजनीरजनी॥

सुनयनविभ्रमरभ्रमरभ्रमरभ्रमराधिपते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥नौ॥

सहितमहाहवमल्लमतल्लिकमल्लरते मल्लरते।

विरचितवल्लिकमल्लिकमल्लिकमल्लिकभल्लिकते॥

सितक्रितफुल्लसमुल्लसितारुणतल्लजपल्लवसल्ललिते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥दस॥

अविरलगण्डगलन्मदमेदुरमत्तमतत्तमरजनरते।

त्रिभुवनभूषणभूतकलानिधिरूपपयोनिधिराजसुते॥

अयि सुदतीजनलालसमानसमोहनमन्मथराजसुते।

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ग्यारह॥

कमलदलामलकोमलकान्तिकलाकलितामलभाललते।

सकलविलासकलानिलयक्रमकेलिचलत्कलह

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