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Agni Raag
Indian Classical

Agni Raag

Dnyaneshwar GoleDnyaneshwar Gole
0 likes1 plays6:29
Style: indian classical, sitar, tabla, tanpura, raaga, meditative, traditional, Energetic, male vocal, aggressive
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जटाट वीगल जलब जटाट वीगल जलब जटाट

प्रवाह पावितस्थले गलेह वलंब्यलंबितां भुजंग तुंग मालिकां।

दमड्ड मढद्ड मढद्ड मन्निनादवड्ड मर्वयं।

चकार चंड तांडवं तनोतुन शिवशिवं।

जटाकटाहसंभमंभमनिलिम्प निर्जरी विलोल्वीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनी धगधधधगज्वलललालाटपटपावके किशोरचंद्रशेखरेरतिप्रतिक्षणम्मू

जटाभुजंग पिंगलस फुरत फणामनि प्रभा कदंब कुंकुमद्रव प्रलिप्त दिग्वधू मुखे

मदांधसिन्धुरस्पुरत्व गुत्तरीय मेदुरे

मनोविनोदमध्भुतंग्भुतंग्भुतभुतभर्तरी

सहस्रलोचनप्रभित्यशेशलेखशेखर

प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरांग्रिपीठभु

भुजंगराजमालयानिबधजाट जूटक

श्रियैचि राय जायतांच कोर बंधुशेखर

ललाट चत्व रज्वलद्धनन जयस्पुलिंग भाः

निपीत पंच सायकं नमनिलिम्पनायकं

सुधामयूख लेखया विराजमान मुर्धनं

महाक पालि संपदेशि रोज टालमस्तुनू

खराल भाल पट्टिकाढः गद्ध गद्ध गज्वलल धनन्जयाहुती कृतप्रचंडपंचसायके

प्रिदुष्चकाल मानंच शिवसर्वार्थ दायको

स्फुरद्धि गन्त संतति प्रमोद मान मानसे

कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्ध दुर्धरापडी

क्वचित्धि गंबरे मनो विनोद मेतु वस्तुनी

चटासमुह भास्मन, क्रिपाक्टाक्षधोरनी, निरुद्ध दुरुधरापदी, क्वचिद्धि गंबरे मन, चिदग्नि कुंड कुंडले, भुजंग तुंग मालिनी, धराधरेंद्रनन्दिनी, कुचाग्रारत्न चत्ररे,

प्रचंडवडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाश्टमी कल्पकल्पिताद्वरप्रसाधनी

महाकपालि संपदेशिरोजटाल मस्तुन भुजंगराजमालयानि बद्ध जाट जूटकम्

शिवस्तुती प्रयच्छतीच गोरबंधु शेखर

स्फुरद्धि गन्त संतति प्रमोदमान मानसे

कृपाक टाक्षधोरणी निरुद्ध दुर्धरापडी

जटाभुजंग पिंगलस्फुरत्फणामनि प्रभा

कदंब कुंकु मद्रव प्रलिप्त दिग्वधू मुखे मदान्ध सिंधुरस्पुरत्व गुत्तरीय मेदुरे

मनोविनोध मद्भुतं विभर्तु भूता भर्तरी

इतिश्रीम चंकराचार्य विरचितं शिवताण्डवस्तोत्रं संपूर्णं

धराधरेंद्रनंदिमीकुचाग्रणत्नचत्ररेचिदग्निकुंडकुंडलेभुजंगतुंगमालिनीः

शिवस्तुती प्रयच्छती चकोरबंधुशेखरा स्थुरद्धि गंत संत तिप्रमोधमानमान।

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