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माँ का स्मरण
Devotional

माँ का स्मरण

suno aisuno ai
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Lyrics

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(हो...)

(ओ...)

(आ...)

रातों की सिलवटें सीने में लिए

चलता रहा मैं अकेला ही सदा

ख्वाबों के टूटे परिंदे उड़े

आँखों में लेकिन न था कोई पता

फिर भी ये दिल कहता है आज़मा

मिलती है मंज़िल उसे जो है जला

ज़िंदगी का सफ़र है ये आग का

दर्द भी संग लिए चलता हूँ मैं

टूट के बिखरूँ तो फिर संभलूँगा

हर मोड़ पे अपना हुनर दिखलाऊँगा

(ज़िंदगी का सफ़र...)

(आ...)

दिन ढलते ही साया बदलता गया

साथ निभाने को कोई न मिला

पर ये अकेलापन है कितना हसीन

इसने ही मुझको सिखाया जीना

हर गिरते ही उठना ज़रूरी है

हौसला दिल का ये कहता है सुब्हा

ज़िंदगी का सफ़र है ये आग का

दर्द भी संग लिए चलता हूँ मैं

टूट के बिखरूँ तो फिर संभलूँगा

हर मोड़ पे अपना हुनर दिखलाऊँगा

(ज़िंदगी का सफ़र...)

(हो...)

मुट्ठी में बाँधे जो सपने थे मेरे

बिखर गए वो तो रेत बनके

फिर भी न आँखों से पानी बहा

मैंने हँसकर अपना दर्द पिया

(हो...)

ज़िंदगी का सफ़र...

(आ...)

ज़िंदगी का सफ़र...

(हो...)

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